छत्तीसगढ़ का ओवरटाइम घोटाला: मजदूरों के पसीने की कमाई डकार गए अफसर, 115 करोड़ की लूट में ACB-EOW ने 7 को दबोचा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में रोज नई और चौंकाने वाली परतें खुल रही हैं। अब इस महाघोटाले के भीतर एक ऐसा सच सामने आया है, जिसने व्यवस्था की संवेदनहीनता को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। यह सिर्फ शराब का नहीं, बल्कि 'मैनपावर घोटाला' है। जहां एक तरफ शराब दुकानों में तैनात छोटे कर्मचारी दिन-रात खट रहे थे, वहीं उनके हिस्से का ओवरटाइम का पैसा भ्रष्ट अधिकारियों और एक बड़े निजी सिंडिकेट की तिजोरियों में भर रहा था।
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की संयुक्त टीम ने इसी मामले में बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
कागजों पर ओवरटाइम', असल में 'कमीशन का खेल
जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2023-24 के बीच राज्य सरकार ने शराब दुकानों में अतिरिक्त ड्यूटी (एक्स्ट्रा शिफ्ट) करने वाले कर्मचारियों के लिए लगभग 115 करोड़ रुपए का भारी-भरकम ओवरटाइम फंड मंजूर किया था। नियम के अनुसार, यह रकम सीधे उन मेहनतकश कर्मचारियों के बैंक खातों में जानी चाहिए थी।
लेकिन, पर्दे के पीछे खेल कुछ और ही था। मैनपावर सप्लाई करने वाली एजेंसियों ने CSMCL (छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर एक नेक्सस तैयार किया। फाइलों में कर्मचारियों का फर्जी और बढ़ा हुआ ओवरटाइम दिखाया गया, बिल पास कराए गए, लेकिन हकीकत में उन कर्मचारियों तक एक फूटी कौड़ी नहीं पहुंची। यह 115 करोड़ रुपए कमीशन और 'कटमनी' के रूप में सफेदपोशों और निजी बिचौलियों के बीच बंट गए।
कैसे फूटा इस 115 करोड़ के फर्जीवाड़े का भांडा?
इस बड़े गबन का पर्दाफाश रातों-रात नहीं हुआ। इसकी नींव प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक सटीक रेड से पड़ी थी:
29 नवंबर 2023 को ED ने रायपुर में 3 संदिग्ध व्यक्तियों को पकड़ा था। इनके पास से 28.80 लाख रुपए नकद बरामद हुए थे।
जब ED ने इस बेहिसाब कैश के सोर्स की गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि यह पैसा उसी 'ओवरटाइम फंड' का हिस्सा है, जिसे कर्मचारियों के नाम पर सरकारी खजाने से निकाला गया था।
ED की इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर ACB ने हरकत में आते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) तथा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
कारोबारी कनेक्शन और पुरानी गिरफ्तारियां
इस घोटाले के तार सिर्फ चंद अधिकारियों तक सीमित नहीं हैं। जांच एजेंसी के दावों के अनुसार, इस पूरे कमीशन के खेल के पीछे कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट का सीधा हस्तक्षेप होने के सुराग मिले हैं।
इस ताज़ा कार्रवाई से पहले ही जांच एजेंसियों ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। करीब दो हफ्ते पहले ACB-EOW की टीम ने मैनपावर मुहैया कराने वाली कंपनी
ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड पर दबिश दी थी। उस दौरान कंपनी के फील्ड ऑफिसर अभिषेक कुमार सिंह और अकाउंटेंट तिजऊ राम निर्मलकर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उनसे हुई कड़ी पूछताछ में ही इन नए 7 आरोपियों तक पहुंचने का रास्ता साफ हुआ।
अब आगे क्या? चलेगा पूछताछ का दौर
सोमवार को गिरफ्तार किए गए सभी 7 आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया गया। अपराध की गंभीरता और मनी ट्रेल (Money Trail) की तह तक जाने के लिए कोर्ट ने सभी को 11 मई तक कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया है।
क्या हैं संभावनाएं? माना जा रहा है कि 11 मई तक चलने वाली इस रिमांड अवधि में कई बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं। फर्जी बिलिंग का सिस्टम कैसे पास हुआ, ऑडिट में इसे कैसे छिपाया गया और 115 करोड़ की इस बड़ी रकम को किन रसूखदारों की संपत्तियों में इन्वेस्ट किया गया, ऐसे तमाम सवालों के जवाब मिलने अभी बाकी हैं। इस 'मैनपावर चैप्टर' ने साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला सिर्फ एक राजस्व की चोरी नहीं, बल्कि निचले तबके के कर्मचारियों के हक पर डाला गया एक सुनियोजित डाका था।
