महाजेनको का ₹110 करोड़ का जमीन घोटाला : छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट ने कैसे लगाई महाराष्ट्र सरकार को चपत, पीएमओ के दखल से मची खलबली

महाजेनको का ₹110 करोड़ का जमीन घोटाला : छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट ने कैसे लगाई महाराष्ट्र सरकार को चपत, पीएमओ के दखल से मची खलबली

रायपुर/मुंबई: महाराष्ट्र को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने की जिम्मेदारी उठाने वाली राज्य की शीर्ष ऊर्जा कंपनी महाजेनको (Mahagenco) खुद छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में एक गहरे और सुनियोजित घोटाले के जाल में फंस गई है। यह मामला सिर्फ ₹110 करोड़ के गबन का नहीं है, बल्कि उस शातिर नेक्सस का है, जिसने वन संरक्षण के नियमों की आड़ में महाराष्ट्र के सरकारी खजाने को खाली कर दिया। अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सख्त रुख और जांच के आदेश के बाद तय हो गया है कि पूर्व की सरकारों के दौरान पनपे इस कॉरपोरेट-नौकरशाही गठजोड़ पर जल्द ही बड़ी गाज गिरेगी।

शराब ठेके, डमी जमीनें और कॉपी-पेस्ट का खेल

गारे पाल्मा सेक्टर-II कोल ब्लॉक के लिए वन मंत्रालय (MoEFCC) से वैधानिक मंजूरी पाने के लिए महाजेनको को 214.869 हेक्टेयर निजी भूमि खरीदकर देनी थी। जांच दस्तावेजों के मुताबिक, मेसर्स लर्न नेचर कंसल्टेंट्स और स्थानीय भू-माफियाओं ने मिलकर एक ऐसी पटकथा लिखी, जो किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है।

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जिन जमीनों को कलेक्टर दर से 6 गुना अधिक कीमत देकर खरीदा गया, उनका भौतिक रूप से कोई अस्तित्व ही नहीं है। इन्हीं फर्जी संपत्तियों को एक ही समय में 11 शेल कंपनियों के जरिए छत्तीसगढ़ में आकर्षक शराब ठेकों की सॉल्वेन्सी (गारंटी) के तौर पर गिरवी रखा गया था। जालसाजी का आलम यह था कि अलग-अलग खसरा नंबरों की रजिस्ट्री में एक ही साइट मैप (नक्शे) को दफ्तर में बैठकर 'कॉपी-पेस्ट' कर दिया गया।

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दिखावे का टेंडर और बिना जांच के भुगतान

भ्रष्टाचार की इस इमारत को कानूनी जामा पहनाने के लिए एक डमी अभिरुचि की अभिव्यक्ति" (EOI) का सहारा लिया गया। इसके विज्ञापन केवल ऐसे गुमनाम स्थानीय अखबारों में छपे, जिनका कोई प्रसार नहीं था। इन्हें सिर्फ फाइल-कॉपी के तौर पर छापा गया ताकि महाजेनको की फाइलों में रिकॉर्ड दुरुस्त दिखे।

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इस पूरे घोटाले का सरगना इंदरपाल भाटिया को बताया जा रहा है। भाटिया ने इन सभी डमी कंपनियों के लिए 'पावर ऑफ अटॉर्नी' (PoA) धारक के रूप में अकेले काम किया। हैरानी की बात यह है कि तमनार तहसील (रायगढ़) में इन करोड़ों के राजस्व रिकॉर्ड पर किसी एसडीएम (SDM) के हस्ताक्षर नहीं हैं। महज एक स्थानीय पटवारी के साइन पर, बिना 50 साल के मालिकाना हक (Title History) की जांच किए, करोड़ों का फंड सीधे बिचौलियों के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।

 पीएमओ ने चलाया हंटर....

इस खुलासे ने महाजेनको की सेंट्रल एनवायर्नमेंटल माइनिंग क्लीयरेंस को भारी खतरे में डाल दिया है। पीएमओ के निदेशक ऋग्वेध एम. ठाकुर के कड़े निर्देश के बाद, महाराष्ट्र के मुख्य सचिव ने महाजेनको के एमडी को पूरा डोजियर सौंपते हुए तत्काल एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब की है।

अब सरकार यह जांच कर रही है कि किन अधिकारियों ने कंपनी की गोपनीयता धाराओं का दुरुपयोग कर इन फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाया। आने वाले दिनों में उन सभी नौकरशाहों और बिचौलियों पर एफआईआर (FIR) और कठोर विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है, जिन्होंने अपनी आंखें मूंदकर इस ₹110 करोड़ के घोटाले को अंजाम तक पहुंचाया।

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