300 करोड़ के एक्सप्रेस-वे का चीरहरण एक मॉल को फायदा पहुंचाने अफसरों ने कर दिया बड़ा खेल, नियम ताक पर रखकर बना दिया VIP रास्ता...
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वीआईपी कल्चर और अफसरों की मनमानी का ऐसा दुर्लभ मामला सामने आया है, जिसने 300 करोड़ रुपए के ड्रीम प्रोजेक्ट को धुंआ- धुआं कर दिया हैं। जिस एक्सप्रेस-वे को शहर के ट्रैफिक को सिग्नल फ्री और निर्बाध बनाने के लिए डिजाइन किया गया था, वहां एक निजी मॉल और कॉलोनाइजर को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया। पंडरी मॉल के ठीक सामने रातों-रात नाला पाटकर एक अनधिकृत VIP रास्ता खोल दिया गया है।
अब सवाल यह है कि आखिर वो कौन सा VVIP अप्रोच या बड़ा लिफाफा था, जिसने पीडब्ल्यूडी, यातायात विभाग और नगर निगम के अफसरों की आंखों पर काला चश्मा लगा दिया।
बिना फाइल, बिना मंजूरी... सिर्फ मौखिक आदेश' का खेल
रायपुर रेलवे स्टेशन से शद्दाणी दरबार तक करीब 12 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण सीजीआरडीसी (CGRDC) ने 300 करोड़ रुपए की लागत से करवाया था। इसका ठेका अहमदाबाद की 'मेसर्स आयरन ट्राय एंगल लिमिटेड' को मिला था। मास्टरप्लान और अनुबंध में साफ था कि यह एक एक्सेस कंट्रोल्ड (नियंत्रित यातायात) मार्ग है, जहां बीच में कोई कट नहीं होगा। इसी वजह से सर्विस लेन के दोनों तरफ ग्रिल लगाई गई थी।
कोरोना काल में निगरानी घटी तो पहले ग्रिल चोरी हुए, और अब सीधे अफसरों ने ही रास्ता खोल दिया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के मुताबिक, ऐसे मार्ग पर नया कट खोलने के लिए शासन स्तर की सक्षम मंजूरी अनिवार्य है। मगर सूत्रों की मानें तो यहां न कोई ट्रैफिक स्टडी हुई, न कोई फाइल दौड़ी, बस ऊपर के किसी मौखिक आदेश पर नाला पाटकर रास्ता दे दिया गया।
300 करोड़ के प्रोजेक्ट में बॉटल नेक का सुराख
एक्सप्रेस-वे की मूल अवधारणा ही बिना रुके तेज यातायात है। लेकिन, सिस्टम के 'बाबू' और इंजीनियर जब मेहरबान हों, तो डिजाइन क्या चीज है? विशेषज्ञों का साफ कहना है कि तेज रफ्तार वाले एक्सप्रेस-वे पर इस तरह का कट हादसों को सीधा न्योता है। गाड़ियां जब अचानक मॉल की तरफ से सर्विस लेन होते हुए एक्सप्रेस-वे पर प्रवेश करेंगी, तो यह जगह एक खतरनाक 'बॉटल नेक' बन जाएगी। जिस सड़क को जाम से मुक्ति के लिए बनाया गया था, वह जल्द ही हादसों और ट्रैफिक जाम का नया केंद्र बन जाएगी।
सुशासन के दावों पर बट्टा?
इस पूरी गफलत की भनक लगते ही सियासत गरमा गई। मामले के तूल पकड़ते ही पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय रविवार शाम अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और इस अवैध रास्ते को बंद करवा दिया। उनका सीधा आरोप है कि सत्ताधारी दल के 'भ्रष्टाचार मुक्त शासन' के दावों के बीच, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अपने निजी और आर्थिक लाभ के लिए बड़े बिल्डरों से मिलीभगत कर रहे हैं। इस एक फैसले ने पूरे प्रोजेक्ट की दिशा ही बदल कर रख दी है।
