दलालों के इशारे पर पास हुए करोड़ों के बिल जल संसाधन विभाग के ईएनसी उइके के घोटालों की सीबीआई जांच की उठी मांग

दलालों के इशारे पर पास हुए करोड़ों के बिल जल संसाधन विभाग के ईएनसी उइके के घोटालों की सीबीआई जांच की उठी मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में इन दिनों भ्रष्टाचार की अजब गजब कहानियां सामने आ रही हैं। विभाग का काम किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना है लेकिन यहां अफसरों ने सरकारी खजाने को ही पानी की तरह बहा दिया। सोचिए कि कोई इंजीनियर बिना मौके पर गए सिर्फ अपने कमरे में आराम से बैठकर गूगल मैप देखे और करोड़ों रुपए का बिल बना दे। सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लगता है लेकिन यह पूरी तरह सच है। विभाग के प्रमुख अभियंता यानी ईएनसी इंद्रजीत उइके के कार्यकाल में ऐसे ही बड़े खेल हुए हैं। अब उनके इन पुराने काले कारनामों की फाइलें खुलने लगी हैं। विभाग में हुए इस महाघोटाले को लेकर अब सीधे सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई है।

दलालों के हाथ में थी विभाग की चाबी

सूत्र बताते हैं कि ईएनसी उइके के समय में भ्रष्टाचार अपने चरम पर था। वसूली का पूरा सिस्टम ऊपर से नीचे तक सेट था। इसके लिए बाकायदा दो खास दलाल तैनात किए गए थे। इन दलालों के पास इतनी पावर थी कि असली अफसर भी इनके सामने फेल थे। यही दलाल तय करते थे कि किस ठेकेदार का बिल पास होगा और किसकी फाइल रोकी जाएगी। जो दलालों तक अपना हिस्सा पहुंचाता उसका काम तुरंत आगे बढ़ता था और जो नियम कानून की बात करता उसकी फाइल धूल खाती रहती थी। इस पूरी सेटिंग के जरिए शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाया गया और ईमानदार अफसरों को किनारे कर दिया गया।

Read More रायपुर सदर बाजार की वक्फ संपत्ति पर बड़ा फैसला! कब्जाधारी को 45 दिन में दुकान खाली करने का आदेश

कमरे में बैठकर गूगल मैप से हुआ सर्वे

Read More मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने सुनी रोने की आवाज, ह्यूम पाइप में मिला नवजात

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला खेल गूगल मैप सर्वे का है। जशपुर जिले के पत्थलगांव इलाके में मैनी नदी पर शेखरपुर और डांडपानी प्रोजेक्ट बनने थे। इन बड़े प्रोजेक्ट के लिए करोड़ों रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी। नियम के मुताबिक काम शुरू होने से पहले टीम को जमीन पर जाकर भौगोलिक सर्वे करना था। लेकिन स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण अफसर वहां नहीं जा सके। अब प्रोजेक्ट हाथ से न निकल जाए और कमीशन मारा न जाए इसलिए अफसरों ने नया जुगाड़ निकाला। उन्होंने घर बैठे गूगल मैप खोला और कागजों पर ही पूरा फर्जी सर्वे तैयार कर लिया। इसी फर्जी और मनगढ़ंत रिपोर्ट के आधार पर 15 करोड़ रुपए का बिल पास करने की फाइल चला दी गई। शुरू में तत्कालीन मुख्य अभियंता उइके ने इस पर कुछ सवाल उठाए और भुगतान रोकने को कहा लेकिन बाद में वह भी खामोश हो गए। केंद्रीय जल आयोग के कड़े निर्देशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया और फाइल आगे बढ़ गई।

जमीन का पता नहीं और कट गए करोड़ों के चेक

घोटालों की लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती है। रामानुजगंज और बलरामपुर इलाके में भी सरकारी पैसे की जमकर लूट हुई। यहां जल संसाधन संभाग क्रमांक दो के कार्यपालन यंत्री संजय ग्रायेकर ने जमीन अधिग्रहण के नाम पर सीधे 8 करोड़ 67 लाख रुपए डकार लिए। इस अफसर ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सीधे योर सेल्फ चेक काटे। इसके बाद यह सारा पैसा अपने चहेते कर्मचारियों और व्यक्तिगत फर्मों के खातों में ट्रांसफर कर दिया। जिन दस बड़ी योजनाओं के नाम पर यह भारी भरकम पैसा निकाला गया उनका जमीन पर कोई वजूद ही नहीं था। वहां एक ईंट भी नहीं रखी गई थी।

इसी तरह सिर्फ तीन महीने के भीतर स्टेशनरी के नाम पर साढ़े तीन करोड़ और मुरूम भराई के नाम पर साढ़े चार करोड़ रुपए ठिकाने लगा दिए गए। इतने बड़े घपले होते रहे लेकिन उइके इन सभी मामलों में अपनी आंखें मूंदे बैठे रहे। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने का काम किया।

रिटायरमेंट के बाद भी कुर्सी से मोह

इंद्रजीत उइके 30 जून 2025 को अपने पद से रिटायर हो गए थे। लेकिन सत्ताधारी नेताओं से उनकी ऐसी मजबूत सेटिंग थी कि सभी सरकारी नियमों को तोड़कर उन्हें उसी पद पर दोबारा संविदा पर बैठा दिया गया। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब किसी रिटायर अफसर को इतने बड़े पद पर दोबारा नियुक्ति मिली हो। सरकारी नियम साफ कहता है कि संविदा अफसर को वित्तीय अधिकार नहीं दिए जा सकते हैं। लेकिन सरकार ने उइके को पूरी पावर सौंप दी। इस मनमानी से विभाग के योग्य और वरिष्ठ इंजीनियरों का प्रमोशन रुक गया जिससे उनमें भारी नाराजगी है।

अब सीबीआई जांच ही एकमात्र रास्ता

अब ईएनसी उइके के इन सभी पुराने और संगीन मामलों ने तूल पकड़ लिया है। बिना काम करोड़ों का भुगतान संविदा पद पर वित्तीय अधिकारों का दुरुपयोग गूगल सर्वे घोटाले में संदिग्ध चुप्पी भू अर्जन फर्जीवाड़े में आरोपियों को बचाना और दलालों के जरिए वसूली जैसे आरोप उनके गले की फांस बन गए हैं। राजनेताओं का सीधा संरक्षण होने के कारण राज्य की एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद खत्म हो गई है। यही कारण है कि अब इस पूरे भ्रष्ट सिंडिकेट को तोड़ने और करोड़ों की लूट का सच जनता के सामने लाने के लिए केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की सिफारिश करने की मांग उठ रही है। लोगों और विभाग के कर्मचारियों का साफ कहना है कि सीबीआई जांच के बिना इस महाघोटाले के असली गुनहगार कभी बेनकाब नहीं होंगे।

  

Error on ReusableComponentWidget
Tags:

Latest News

रायपुर में मोहल्लेवासियों ने पकड़ी गांजे की बड़ी खेप! नाली में फंसी स्कॉर्पियो से 5 क्विंटल गांजा बरामद, ड्राइवर फरार रायपुर में मोहल्लेवासियों ने पकड़ी गांजे की बड़ी खेप! नाली में फंसी स्कॉर्पियो से 5 क्विंटल गांजा बरामद, ड्राइवर फरार
भ्रष्टाचार का गजब खेल: जिसके खिलाफ 42 लाख के फर्जी बिल की शिकायत, सरकार ने उसी अफसर को सौंप दी जांच; कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से भी अधिकारी के..........
डकैती का प्लान, हथियार और औजार तैयार! प्रतापगढ़ पुलिस ने वारदात से पहले 4 बदमाश दबोचे, एक फरार
सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने आईजी ने दिए सख्त निर्देश, नाबालिग वाहन चालकों और हाईवे पर अवैध पार्किंग पर कार्रवाई
रायपुर एयरपोर्ट भी PPP मॉडल पर जाएगा? 50 साल की लीज पर देने की तैयारी, देश के 11 एयरपोर्ट होंगे समूहों में शामिल
हिजाब विवाद पर इलाहाबाद HC की दो टूक! ‘अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं’, स्कूल ड्रेस कोड बदलने की मांग खारिज
BPSC पर पटना में फिर बवाल! CM आवास घेरने निकले छात्र, बैरिकेडिंग तोड़ी तो पुलिस से हुई झड़प
1500 ट्रकों वाले HTC पर GST की दस्तक! इंद्रजीत सिंह के ठिकानों पर भिलाई से बलौदाबाजार तक घंटों खंगाले रिकॉर्ड
पासबुक में पैसा जमा दिखाता रहा, खाते में निकला खाली! किओस्क संचालक पर 1.75 करोड़ के कथित गबन का आरोप
स्वामी आत्मानंद स्कूल में टली बड़ी अनहोनी! बारिश के बीच भरभराकर गिरी छत, प्रिंसिपल ऑफिस समेत 4 कमरे क्षतिग्रस्त, देखे वीडियो
NEET पेपर लीक विवाद फिर गरमाया! वादे पूरे न होने पर CJP का ऐलान, 5 सितंबर को इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च
कर्नाटक में Amazon, Instamart और BigBasket पर एक्शन! धतूरा की ऑनलाइन बिक्री पर फूड लाइसेंस सस्पेंड