घटना स्थल पर जब तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची, तब तक आग होटल का फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खाद्य सामग्री सहित अन्य सामान जलकर राख हो चूका था , जिससे सालों की कमाई कुछ मिनटों में बरबाद हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर तखतपुर में स्थायी फायर ब्रिगेड की व्यवस्था होती तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी फायर ब्रिगेड नहीं हुआ उपलब्ध
गौरतलब है कि करीब दो वर्ष पहले मुख्यमंत्री ने तखतपुर में फायर ब्रिगेड उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक यह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी l हर आगजनी की घटना के बाद फायर ब्रिगेड की कमी का मुद्दा उठता है, लेकिन इसका स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया है। घटना के बाद लोगों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि आग जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव हैं , जो एक गंभीर चिंता का विषय है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और प्रशासन की सुस्त कार्यशैली का खामियाजा आम नागरिकों को बार-बार भुगतना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि करीब दो वर्ष पहले मुख्यमंत्री ने तखतपुर में फायर ब्रिगेड उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक यह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी l हर आगजनी की घटना के बाद फायर ब्रिगेड की कमी का मुद्दा उठता है, लेकिन इसका स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया है। घटना के बाद लोगों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि आग जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव हैं , जो एक गंभीर चिंता का विषय है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और प्रशासन की सुस्त कार्यशैली का खामियाजा आम नागरिकों को बार-बार भुगतना पड़ रहा है।
