नवा रायपुर में करोड़ों के डिजिटल कियोस्क ठप अफसर का कमरा खोजने भटक रही जनता
रायपुर। नवा रायपुर को डिजिटल गवर्नेस का मॉडल बताने वाले दावे महानदी भवन और इंद्रावती भवन में फेल हो गए हैं। आम जनता की सुविधा के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे। इन सरकारी इमारतों में जगह जगह डिजिटल इंटरैक्टिव सूचना कियोस्क लगाए गए थे। अब ये महंगी मशीनें सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं। दूरदराज के जिलों से अपनी शिकायत लेकर आने वाले लोग परेशान हैं। उन्हें सही विभाग या अफसर का कमरा नहीं मिल रहा है। लोग इधर उधर भटकने और दूसरों से रास्ता पूछने को मजबूर हैं।
महानदी भवन और इंद्रावती भवन प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक केंद्र हैं। यहां हर दिन पूरे राज्य से हजारों लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं। कियोस्क लगाने का असली मकसद रिसेप्शन पर भीड़ कम करना था। सेल्फ सर्विस व्यवस्था से लोग कुछ सेकंड में अपनी जानकारी खुद निकाल सकते थे। करोड़ों की मशीनें खराब होने से अब हर छोटी बड़ी जानकारी के लिए हेल्प डेस्क का सहारा लेना पड़ रहा है। लोग रिसेप्शन काउंटरों पर पूरी तरह निर्भर हैं। नतीजा यह है कि काउंटरों पर लंबी कतारें लग रही हैं। कर्मचारियों पर भी बेवजह काम का बोझ बढ़ गया है। लोग परेशान होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं।
इन मशीनों को इसलिए लगाया गया था कि कोई भी फरियादी भवन में आते ही टचस्क्रीन के जरिए सारी जानकारी ले सके। योजना थी कि बिना किसी कर्मचारी की मिन्नतें किए संबंधित विभाग अधिकारी कक्ष संख्या मंजिल और ब्लॉक का पता चल जाए। सिस्टम की लापरवाही ने इस पूरी योजना को बर्बाद कर दिया है। परिसरों में लगे कियोस्क लंबे समय से बंद पड़े हैं। कहीं टचस्क्रीन काम नहीं कर रही तो कहीं पूरा सिस्टम ब्लैकआउट है। मशीनें सिर्फ सजावटी डिब्बा बन गई हैं। मेंटेनेंस के अभाव में यह योजना दम तोड़ चुकी है।
इस लापरवाही का सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को उठाना पड़ रहा है जो पहली बार मंत्रालय या इंद्रावती भवन पहुंचते हैं। इस विशाल परिसर की भूलभुलैया में सही शाखा या अफसर का कमरा खोजना मुश्किल है। लोगों को मजबूरी में सुरक्षाकर्मियों बाबुओं या वहां से गुजरने वाले अन्य लोगों के आगे हाथ जोड़ने पड़ते हैं। गाईड से रास्ता पूछना पड़ रहा है। इससे लोगों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है। परिसरों में फालतू भीड़ और अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है।
इस पूरे मामले में अधिकारियों की अनभिज्ञता भी सामने आई है। रायपुर स्मार्ट सिटी के मुख्य अभियंता अतुल चोपड़ा का कहना है कि कियोस्क मशीन खराब होने की जानकारी उन्हें अभी मिल रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वह इसकी जांच करवाएंगे और जल्द से जल्द मशीनों को सुधारने का काम करेंगे।
