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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बोर्ड की तर्ज पर होगी 5वीं-8वीं की परीक्षा; निजी स्कूलों के सवा लाख छात्रों पर गहराया रिजल्ट का संकट
1740 स्कूलों ने नहीं उठाईं सीजी बोर्ड की किताबें, अब सरकारी सिलेबस से पेपर होने पर बच्चों की बढ़ीं मुश्किलें
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक ताजा फैसले ने प्रदेश के 1740 निजी स्कूलों और वहां पढ़ रहे सवा लाख से अधिक छात्रों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कक्षा 5वीं और 8वीं की परीक्षा स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बोर्ड की तर्ज पर ही ली जाएगी। इस फैसले के बाद उन छात्रों पर बड़ा संकट आ गया है, जिन्होंने पूरे साल सीजी बोर्ड के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ी हैं। अब शिक्षा विभाग सीजी बोर्ड के आधिकारिक सिलेबस के आधार पर परीक्षा आयोजित करेगा, जिससे छात्रों के परीक्षा परिणाम पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।
नियमों की अनदेखी: निजी प्रकाशकों के भरोसे पढ़ाई
जांच में यह बात सामने आई है कि प्रदेश के लगभग 1740 निजी स्कूलों ने इस साल पाठ्य पुस्तक निगम (पापुनि) से सीजी बोर्ड की सरकारी किताबें उठाई ही नहीं हैं। ये स्कूल नियमविरुद्ध तरीके से निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें पढ़ा रहे हैं। हालांकि, शासन स्तर से कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि सीजी बोर्ड की किताबें नहीं पढ़ाने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाएगी, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
करोड़ों की सरकारी किताबें हो रहीं बर्बाद
पाठ्य पुस्तक निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, प्रतिवर्ष 1000 से 1200 निजी स्कूल सरकारी किताबें नहीं लेते हैं। निगम 'यू डाइस' के आंकड़ों के आधार पर किताबों की छपाई करता है, लेकिन स्कूलों द्वारा इन्हें न उठाने के कारण करोड़ों रुपए की किताबें बेकार हो जाती हैं। इस भारी आर्थिक नुकसान की जवाबदेही तय करने वाला कोई नहीं है। न तो पापुनि की टीमें और न ही डीईओ या बीईओ स्तर पर इसकी नियमित जांच की जा रही है।
विभाग की बढ़ी चुनौती: अब सेंटर से लेकर पेपर तक की तैयारी
कोर्ट के निर्देश के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति है। अब तक निजी स्कूल अपने स्तर पर ही परीक्षाएं आयोजित करते थे, लेकिन अब पेपर सेट करने से लेकर परीक्षा केंद्र तय करने की जिम्मेदारी विभाग की होगी। अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिन बच्चों ने बोर्ड का सिलेबस पढ़ा ही नहीं, वे परीक्षा कैसे देंगे।
पाठ्य पुस्तक निगम की ओर से समय पर किताबें नहीं दी गईं। स्कूलों ने पीडीएफ और फोटोकॉपी के जरिए पढ़ाई करवाई है। शिक्षा विभाग द्वारा परीक्षा लिए जाने की वैधानिकता पर सवाल है।"
राजीव गुप्ता, अध्यक्ष, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, छत्तीसगढ़
जिन स्कूलों ने किताबें नहीं उठाई हैं, उनकी जानकारी डीपीआई को दे दी गई है। कार्रवाई का अधिकार उन्हीं के पास है।"
डिगेश पटेल, जीएम, पाठ्य पुस्तक निगम
निर्देशानुसार सभी स्कूलों में सीजी बोर्ड के सिलेबस के हिसाब से परीक्षा लेनी है। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और डीईओ को कार्रवाई के लिए अधिकृत किया गया है।"
हिमांशु भारतीय, डीईओ, रायपुर
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
