रायपुर नंदनवन विवाद: ACB के हत्थे चढ़े अफसर को किसने दी प्राइम पोस्टिंग? रिटायरमेंट से ठीक पहले SDO दुबे पर गिरी जांच की गाज, रेंजर को भी हटाने की सिफारिश
NJV डेस्क, रायपुर
राजधानी रायपुर के वन महकमे में इन दिनों नंदनवन पक्षी विहार का विवाद सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। भ्रष्टाचार के पुराने मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई झेल चुके और इसी साल जुलाई में रिटायर होने जा रहे SDO आर.पी. दुबे एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। रेंजर हिमाचल साहू की 12 बिंदुओं वाली लिखित शिकायत ने वन भवन में ऐसा हड़कंप मचाया कि रविवार के अवकाश के बावजूद डीएफओ को नंदनवन दौड़ना पड़ा। अब इस मामले की जांच रिपोर्ट सीसीएफ के मार्फत शासन तक पहुंच चुकी है। आज सोमवार को मंत्रालय के गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यही है कि आखिर एक दागी अफसर को राजधानी की इतनी महत्वपूर्ण और मलाईदार पोस्टिंग कैसे और किसके आशीर्वाद से मिल गई?
दागी अफसर, फिर भी 'प्राइम पोस्टिंग' का इनाम
इस पूरे विवाद ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और ट्रांसफर-पोस्टिंग के सिस्टम पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। दरअसल, SDO आर.पी. दुबे का विवादों से पुराना नाता रहा है। करीब 8 साल पहले गरियाबंद में पदस्थापना के दौरान उन्हें ACB की टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जमानत पर रिहा होने के बाद उन्होंने अपने रसूख का ऐसा 'सिस्टमैटिक' इस्तेमाल किया कि करीब 6 साल तक चालान ही अटका रहा। हाल ही में जब उनका चालान कोर्ट में पेश हुआ, उसके बावजूद महकमे ने उन्हें रायपुर के नंदनवन जैसी प्राइम पोस्टिंग से नवाज दिया। अब उनके रिटायरमेंट में महज दो महीने बचे हैं, लेकिन विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा है।
फर्जी बिल और 'बंगले' की धौंस
रेंजर हिमाचल साहू ने SDO दुबे पर जो 12 सूत्रीय आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। शिकायत के मुताबिक, SDO लगातार स्टाफ को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। रेंजर पर शासन के पैसों के गबन के लिए फर्जी बिल बनाने का अनुचित दबाव डाला जा रहा था। जब रेंजर ने इससे इनकार किया, तो SDO द्वारा उन्हें 'बंगले' (सत्ता शीर्ष या रसूखदार नेताओं के निवास) पर तलब करवाने और वहां की धौंस दिखाकर डराने-धमकाने का प्रयास किया गया।
रविवार को हुआ एक्शन, आज क्या होगा?
कल रविवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ मयंक पांडे सुबह-सुबह नंदनवन पहुंच गए थे। वहां उन्होंने SDO दुबे और शिकायतकर्ता रेंजर हिमाचल साहू को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की। साथ ही दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी अलग से बुलाकर उनके बयान दर्ज किए गए, ताकि यह पता चल सके कि मैदानी अमले के साथ SDO का बर्ताव वास्तव में कैसा था। सूत्रों की मानें तो कर्मचारियों ने भी जांच अधिकारी के सामने अपना दर्द बयां किया है।
रेंजर पर भी गिर सकती है गाज
इस पूरी कहानी में अब एक नया प्रशासनिक मोड़ आ गया है। खबर है कि डीएफओ ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सीसीएफ मणिवासन को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में सिर्फ SDO पर ही कार्रवाई की बात नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कसावट और विवाद को जड़ से खत्म करने के लिए शिकायत करने वाले रेंजर को भी नंदनवन से अन्यत्र पदस्थ करने की सिफारिश की गई है। यानी विवाद के इस लपेटे में रेंजर का भी नपना लगभग तय माना जा रहा है।
शासन के पाले में गेंद
सीसीएफ मणिवासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय शासन के स्तर पर ही लिया जाएगा। चूँकि जांच रिपोर्ट कल ही उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है, इसलिए आज सोमवार को अरण्य भवन से लेकर मंत्रालय तक किसी बड़े आदेश के जारी होने की सुगबुगाहट तेज है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या दागी SDO को रिटायरमेंट से ठीक पहले कोई सज़ा मिलती है, या अपने पुराने रसूख के दम पर वे इस बार भी बेदाग बच निकलेंगे।
