पावर गॉसिप: मैडम एएसपी की फाइल दबाने का खेल!
पीएचक्यू (PHQ) के गलियारों में इन दिनों एक फाइल को लेकर जबरदस्त 'खुसर-फुसर' चल रही है। सत्ता और खाकी के इस कॉकटेल में एक रसूखदार अधिकारी को बचाने के लिए पूरा सिस्टम कैसे काम करता है, यह उसका जीता-जागता उदाहरण बन गया है। मामला दुर्ग जिले में पदस्थ एक तेजतर्रार महिला एडिशनल एसपी से जुड़ा है, जिनकी कार्यशैली हमेशा से विवादों और चर्चाओं का विषय रही है।
डीजीपी के निर्देश और एडीजी (प्रशासन) की 'चुप्पी
हुआ यूं कि मैडम के खिलाफ लगातार मिल रही गंभीर शिकायतों के बाद, विभागीय जांच का प्रस्ताव पुलिस महानिदेशक (DGP) के पास भेजा गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी ने एडीजी (प्रशासन) को कड़े निर्देश दिए कि मामले में तत्काल प्रभाव से पत्र या नोटिस जारी किया जाए। लेकिन, यहीं पर 'सिस्टम' ने अपना असली रंग दिखा दिया। पीएचक्यू के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो एडीजी (प्रशासन) ने इस नोटिस को जारी करने के बजाय फाइल को ही दबा कर रख लिया है और वे कथित तौर पर इसे रोके रखने के लिए पूरी तरह सहमत भी हो गए हैं।
सभी की लॉबिंग और 26 तारीख का रहस्य
इस फाइल को रुकवाने के लिए पर्दे के पीछे जबरदस्त खेल चल रहा है। मैडम के बचाव में उतरे सभी लोग दिन-रात एक किए हुए हैं कि किसी भी तरह से विभागीय आरोप पत्र 26 तारीख तक जारी न हो पाए। अब पुलिस महकमे में यह सवाल तैर रहा है कि क्या 26 तारीख के बाद मैडम के खिलाफ वाकई कोई कार्रवाई होगी (विभागीय आरोप पत्र जारी होगा या नहीं, इस पर गहरी शंका है) या फिर इस फाइल को हमेशा के लिए दफन कर दिया जाएगा?
एसपी के खिलाफ रची जा रही साजिश
इस पूरी सेटिंग-गेटिंग और बवाल के बीच एक नया मोड़ यह आ गया है कि मैडम को बचाने वाला यह सिंडिकेट अब दुर्ग के स्थानीय एसपी के खिलाफ ही लामबंद हो गया है। उन्हें रास्ते से हटाने या उन पर दबाव बनाने के लिए अंदरखाने साजिशें रची जा रही हैं।
करोड़ों का बंगला, रसूख और मुखबिर तंत्र
मैडम एएसपी का रसूख सिर्फ पुलिस विभाग तक सीमित नहीं है। जोरा धर्मपुरा रोड पर स्थित उनके करोड़ों के आलीशान बंगले की चर्चा अक्सर चाय की चुस्कियों के साथ होती है। उनका नेटवर्क इतना तगड़ा है कि बड़े अधिकारियों से लेकर राजनेताओं तक से उनके सीधे संबंध हैं। यहां तक कि एक पूर्व मंत्री की बेटी से भी उनके 'क्लोज रिलेशन' बताए जाते हैं। उनके इस तिलिस्म को मजबूत बनाने में कुछ खास थाना प्रभारी, हवलदार और आरक्षक शामिल हैं, जो उनके लिए निजी तौर पर मुखबिरी का काम करते हैं।
पुराने विवाद: जब जवानों ने मांगी थी सामूहिक आत्महत्या की इजाजत
मैडम का विवादों से पुराना नाता रहा है। याद हो कि इसी साल फरवरी 2025 में दुर्ग जिले के ट्रैफिक जवानों ने मैडम की प्रताड़ना (harassment) से तंग आकर सामूहिक आत्महत्या की अनुमति मांग ली थी। जवानों का सीधा आरोप था कि अनुशासन के नाम पर उनका अत्यधिक शोषण और उन पर बेजा दबाव बनाया जा रहा है। भूखे पेट ड्यूटी करने वाले जवानों की इस पीड़ा को 'संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ' और आजाद जनता पार्टी के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने पुरजोर तरीके से उठाया था। न्याय दिलाने के लिए वे गृह मंत्री विजय शर्मा के निवास तक भी गए थे, हालांकि प्रवास के चलते तब मुलाकात नहीं हो पाई थी।
गडकरी तक पहुंची थी शिकायत
बात सिर्फ पुलिसकर्मियों के शोषण तक नहीं रुकी थी। दुर्ग के कुछ ट्रांसपोर्टरों ने भी केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को बाकायदा पत्र लिखकर मैडम द्वारा बेवजह परेशान किए जाने की गंभीर शिकायत की थी, जिस पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, यह किसी को नहीं पता।
रायपुर से लेकर कवर्धा तक विवाद
अगर पुराने पन्ने पलटें तो मैडम का ट्रैक रिकॉर्ड हमेशा से ऐसा ही रहा है। रायपुर के सखी सेंटर में एक महिला वकील के साथ हुई हाथापाई का मामला हो, कवर्धा की पोस्टिंग के दौरान का बवाल हो या फिर वायरलेस विभाग में पदस्थापना का समय, हर जगह उनका नाम विवादों से घिरा रहा है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या डीजीपी के निर्देशों का पालन होगा, या फिर एडीजी (प्रशासन) की टेबल पर 26 तारीख के इंतजार में यह फाइल हमेशा के लिए 'खत्म' हो जाएगी!
