एक ही नंबर के दो-दो गाडिय़ां रखने वाले कांग्रेस नेता त्रिलोक की खिलाफ कोर्ट ने दिया अपराध दर्ज करने के निर्देश
राष्ट्रीय जगत विजन। बिलासपुर शहर में रसूखदार और फर्जीवाड़े का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसमें एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर की दो-दो टाटा सफारी सडक़ों पर दौड़ रही थीं। यह पूरा मामला तब खुला जब सीएसईबी से रिटायर कर्मचारी मदन मोहन पाण्डेय ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए बिलासपुर की नवम व्यवहार न्यायाधीश कोनिका यादव ने कोनी थाना प्रभारी को कांग्रेस नेता त्रिलोक श्रीवास के खिलाफ तुरंत अपराध दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस को साफ कहा है कि आदेश मिलने के तीन दिन के भीतर एफआईआर की कॉपी अदालत में पेश की जाए।
मदन मोहन ने आरोप लगाया था कि वार्ड नंबर 68 बड़ी कोनी का रहने वाला त्रिलोक श्रीवास साल 2017-18 से दो सफेद और काले रंग की टाटा सफारी गाडिय़ां चला रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि दोनों ही गाडिय़ों पर एक ही वीआईपी नंबर सीजी 10 एएन 0099 लिखा हुआ है। रसूख दिखाने के लिए गाडिय़ों के आगे राजनीतिक पद का बोर्ड भी लगा रखा है ताकि कोई पुलिस वाला उन्हें रोकने की हिम्मत न कर सके।
गाडिय़ों का उपयोग डराने-धमकाने के लिए
शिकायत के मुताबिक इन गाडिय़ों का इस्तेमाल डराने-धमकाने और अन्य गलत कामों के लिए किया जा रहा था। जब पीडि़त ने इसकी शिकायत अफसरों से की, तो आरोपी ने पुलिस को गुमराह करते हुए कह दिया कि सफेद गाड़ी उसके दोस्त नवल किशोर शर्मा की है और पार्किंग की जगह नहीं होने के कारण उसने अपने घर पर खड़ी की है। हालांकि दोस्त ने कोर्ट में इस बात से साफ मुकरते हुए कह दिया कि गाड़ी उसकी नहीं है।
एक ही नंबर दो गाडिय़ों का इस्तेमाल कानून का खुला उल्लंघन
न्यायाधीश कोनिका यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि बिना रजिस्ट्रेशन के गाड़ी चलाना और एक ही नंबर का दो जगह इस्तेमाल करना कानून का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि पहली नजर में यह मामला मोटरयान अधिनियम की धारा 39 और 192 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। अब कोनी पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज कर यह पता लगाएगी कि कांग्रेस नेता की दोनों गाड़ियों पर एक ही नंबर लिखा होने का राज क्या है।
स्थानीय पुलिस के कार्यप्रणाली पर उठे सवाल ?
अब कोनी पुलिस को इस मामले की पूरी जांच कर जल्द ही फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में जमा करनी होगी। बिलासपुर के इस वीआईपी फर्जीवाड़े ने आरटीओ और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इतने सालों से एक ही नंबर पर दो गाडिय़ां सडक़ों पर कैसे घूमती रहीं।
