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आज से AI कंटेंट पर सख्त नियम लागू: 3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक सामग्री, ‘डिजिटल डीएनए’ से होगी पहचान
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 20 फरवरी 2026 यानि आज से नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब यदि कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो AI की मदद से तैयार किया गया है, तो उस पर स्पष्ट रूप से “AI Generated” का लेबल लगाना अनिवार्य होगा। नियमों का उद्देश्य डिजिटल स्पेस को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।
हर AI कंटेंट पर अनिवार्य होगा लेबल
नए दिशा-निर्देशों के तहत AI से तैयार सामग्री पर स्पष्ट पहचान देना जरूरी होगा, जैसे खाद्य उत्पादों पर शाकाहारी/मांसाहारी का निशान होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी नेता का AI-निर्मित भाषण वीडियो बनाया गया है, तो वीडियो के कोने में इसका उल्लेख अनिवार्य रूप से दिखेगा।
‘डिजिटल डीएनए’ से होगी ट्रैकिंग
अब हर AI फाइल में एक विशेष तकनीकी मार्कर या “डिजिटल डीएनए” एम्बेड किया जाएगा। इसमें यह जानकारी दर्ज होगी कि कंटेंट कब बनाया गया, किस AI टूल से तैयार हुआ और पहली बार किस प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया है ? यदि कोई व्यक्ति इस मेटाडेटा या लेबल को हटाने की कोशिश करता है, तो यह गैर-कानूनी माना जाएगा। ऐसी स्थिति में कंटेंट स्वतः डिलीट हो सकता है या संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
36 घंटे नहीं, अब सिर्फ 3 घंटे की समयसीमा
पहले सोशल मीडिया कंपनियों को आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट हटाने के लिए 36 घंटे का समय मिलता था। नए नियमों के तहत शिकायत मिलने के बाद मात्र 3 घंटे के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य होगा।
गंभीर अपराधों पर कड़ी सजा
यदि AI का उपयोग निम्न कार्यों के लिए किया गया, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा
- चाइल्ड पोर्नोग्राफी
- अश्लील या भ्रामक सामग्री
- डीपफेक के जरिए किसी की पहचान का दुरुपयोग
- हथियारों से जुड़ी खतरनाक जानकारी का प्रसार
- चुनाव को प्रभावित करने वाले फर्जी कंटेंट
अब कंटेंट अपलोड करते समय यूजर को यह घोषित करना होगा कि सामग्री AI से बनाई गई है या नहीं। गलत जानकारी देने पर न केवल यूजर बल्कि प्लेटफॉर्म भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
सरकार का बयान
Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) का कहना है कि इन नियमों का मकसद “ओपन, सेफ और ट्रस्टेड इंटरनेट” बनाना है। हाल ही में आयोजित AI समिट में Narendra Modi ने भी डिजिटल कंटेंट पर स्पष्ट पहचान की जरूरत पर जोर देते हुए कहा था कि जैसे खाद्य उत्पादों पर न्यूट्रिशन लेबल होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी पारदर्शिता आवश्यक है। सरकार का मानना है कि इन नए प्रावधानों से डीपफेक, फर्जी वीडियो और भ्रामक सूचनाओं पर अंकुश लगेगा तथा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का भरोसा मजबूत होगा।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
