Cyber Crime Alert: जैसे ही फोन हुआ ऑफ, मास्टरमाइंड करता है पूरा डेटा साफ, देशभर में फैले ठगी नेटवर्क का खुलासा
कानपुर। ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के जरिए ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का चौंकाने वाला कार्यप्रणाली सामने आया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि गैंग का मास्टरमाइंड अपने नेटवर्क पर लगातार नजर रखता है और जैसे ही किसी सदस्य का मोबाइल कुछ घंटों तक निष्क्रिय होता है, उसे गिरफ्तारी का संकेत मान लिया जाता है। इसके बाद तुरंत उस डिवाइस से जुड़ा पूरा डेटा रिमोट एक्सेस के जरिए डिलीट कर दिया जाता है, जिससे जांच एजेंसियों को कोई ठोस सबूत न मिल सके।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह देश के कई राज्यों मोहाली, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना तक फैला हुआ है और दो अलग-अलग टीमों के जरिए काम करता है। एक टीम डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर लोगों को ठगती है, जबकि दूसरी टीम ठगी की रकम को सट्टेबाजी और कैसिनो प्लेटफॉर्म में खपाकर ट्रांजैक्शन को छुपाने का काम करती है। ठगी की रकम का हिस्सा नकद और बैंक खातों के जरिए बांटा जाता है, जबकि बड़ी रकम को क्रिप्टोकरेंसी और USDT में बदलकर ट्रेसिंग से बचने की कोशिश की जाती है।
गिरोह सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित गेम्स की क्लोन वेबसाइट बनाकर लोगों को लालच देता था, जिसमें दोगुना पैसा कमाने का झांसा दिया जाता था। जैसे ही यूजर रजिस्ट्रेशन कर पैसे जमा करता, उसे जाल में फंसा लिया जाता। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और संबंधित खातों व डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के संगठित साइबर अपराध से निपटने के लिए तकनीकी निगरानी और जागरूकता दोनों बेहद जरूरी हैं।
