‘बेटी चली गई, लेकिन सच अब भी गायब’… त्विषा शर्मा केस में कॉल रिकॉर्ड्स से मचा बवाल

‘बेटी चली गई, लेकिन सच अब भी गायब’… त्विषा शर्मा केस में कॉल रिकॉर्ड्स से मचा बवाल

नोएडा: Noida में चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले ने अब नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया है। बेटी की संदिग्ध मौत के बाद न्याय की लड़ाई लड़ रहे परिवार ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं, जिनसे जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। मृतका के पिता ने मीडिया को लिखे पत्र में दावा किया है कि घटना के तुरंत बाद मुख्य आरोपी की ओर से कई प्रभावशाली लोगों, प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी सेवाओं से जुड़े व्यक्तियों से लगातार संपर्क किया गया। परिवार का कहना है कि इन कॉल्स और संपर्कों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।

पीड़ित परिवार के अनुसार, उन्हें अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स से पता चला कि घटना के शुरुआती घंटों में आरोपी पक्ष ने शासन, पुलिस, न्यायपालिका और तकनीकी कर्मचारियों से बातचीत की थी। परिवार ने सवाल उठाया है कि यदि मामला सामान्य था, तो फिर सीसीटीवी और डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े लोगों से तत्काल संपर्क करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने आशंका जताई है कि इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश की गई हो सकती है।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि जिस समय वे अपनी बेटी की मौत की सूचना तक पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, उसी समय आरोपी प्रभावशाली लोगों से संपर्क साध रहे थे। पीड़ित पिता ने कहा कि उनकी बेटी का पार्थिव शरीर 10 दिनों से अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहा है, क्योंकि परिवार पहले मौत की असली वजह सामने लाना चाहता है। उन्होंने दोबारा पोस्टमार्टम और स्वतंत्र जांच की मांग को भी दोहराया है।

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मामले में एक और बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब परिवार ने आरोप लगाया कि जांच पूरी होने से पहले आरोपी पक्ष मीडिया इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए माहौल प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। परिवार का कहना है कि जांच केवल सबूतों और फोरेंसिक तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि रसूख और सार्वजनिक छवि के दबाव में। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी मामले को लेकर तीखी बहस जारी है।

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परिवार ने SIT से चार अहम मांगें रखी हैं, जिनमें कॉल रिकॉर्ड्स, व्हाट्सएप चैट और डिजिटल लॉग्स की विस्तृत फोरेंसिक जांच शामिल है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि शुरुआती घंटों में हुए प्रभावशाली संपर्कों का असर एफआईआर, तकनीकी सबूतों और पोस्टमार्टम प्रक्रिया पर पड़ा या नहीं, इसकी भी निष्पक्ष पड़ताल हो। परिवार ने गवाहों और डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित करने की अपील की है।

पीड़ित परिवार ने अंत में न्यायपालिका और देश की संस्थाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे बदला नहीं, केवल निष्पक्ष जांच चाहते हैं। परिवार ने सवाल उठाया कि यदि यही घटना किसी सामान्य परिवार के साथ होती, तो क्या जांच की प्रक्रिया इतनी धीमी और विवादों से घिरी होती? अब इस पूरे मामले पर सबकी नजर SIT की अगली कार्रवाई और जांच की दिशा पर टिकी हुई है।

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