महिलाओं को थायरॉइड होने के बाद क्या चीजें नहीं खानी चाहिए?

आज के समय में महिलाओं में थायरॉइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है. थायरॉइड गर्दन के आगे की तरफ मौजूद एक छोटी ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने वाले हॉर्मोन बनाती है. जब यह ग्रंथि कम या ज्यादा हॉर्मोन बनाने लगती है, तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है. महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, तनाव, अनियमित दिनचर्या, आयोडीन की कमी या अधिकता, ऑटोइम्यून बीमारी, जेनेटिक कारण और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले बदलाव इसके मुख्य कारण हो सकते हैं.

थायरॉइड की समस्या होने पर वजन बढ़ना या घटना, थकान, बाल झड़ना, मूड स्विंग, पीरियड्स में गड़बड़ी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. ऐसे में सही समय पर जांच और संतुलित लाइफस्टाइल बेहद जरूरी हो जाती है. खासतौर पर खानपान का सीधा असर थायरॉइड हॉर्मोन पर पड़ता है, इसलिए डाइट को लेकर सतर्क रहना बहुत जरूरी है. आइए जानते हैं कि महिलाओं को थायरॉइड होने के बाद क्या चीजें नहीं खानी चाहिए.

थायरॉइड होने के बाद क्या चीजें नहीं खानी चाहिए?
डॉ. बताती हैं कि थायरॉइड की समस्या में कुछ चीजों का सेवन सीमित या बंद करना फायदेमंद माना जाता है. ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, तली-भुनी चीजें और जंक फूड से बचना चाहिए, क्योंकि ये वजन बढ़ाते हैं और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं. ज्यादा मीठा और रिफाइंड शुगर भी नुकसान पहुंचा सकती है. सोया और सोया से बनी चीजें अधिक मात्रा में लेने से थायरॉइड दवा के असर पर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है.

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पत्तागोभी, फूलगोभी और ब्रोकली जैसी क्रूसीफेरस सब्जियों को कच्चा अधिक मात्रा में खाने से बचें, हालांकि पकी हुई मात्रा सीमित रूप में ली जा सकती है. ज्यादा कैफीन और शराब भी हॉर्मोन संतुलन बिगाड़ सकती है. आयोडीन का अत्यधिक सेवन भी नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है. किसी भी बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है.

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खाएं ये चीजें
थायरॉइड में संतुलित और पोषक डाइट लेना जरूरी है. हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और दालें फायदेमंद रहती हैं. प्रोटीन के लिए दही, पनीर, अंडा और दालें शामिल करें. सेलेनियम और जिंक से भरपूर चीजें जैसे कद्दू के बीज और नट्स भी मददगार हो सकते हैं. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और फाइबर युक्त भोजन लेना पाचन और वजन नियंत्रण में सहायक होता है.

ऐसे भी रखें सेहत का ध्यान
थायरॉइड की समस्या में केवल दवा ही नहीं, बल्कि नियमित लाइफस्टाइल भी जरूरी है. रोज हल्की एक्सरसाइज या योग करें, ताकि मेटाबॉलिज्म बेहतर रहे. तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन अपनाएं और पूरी नींद लें. डॉक्टर द्वारा दी गई दवा समय पर और खाली पेट लें. नियमित जांच कराते रहें, ताकि हॉर्मोन स्तर पर नजर बनी रहे. संतुलित दिनचर्या से स्थिति को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है.

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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