क्या होती है टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग? जानें कैसे यह तरीका वजन घटाने और डायबिटीज को कर सकता है कंट्रोल

क्या होती है टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग? जानें कैसे यह तरीका वजन घटाने और डायबिटीज को कर सकता है कंट्रोल

वजन को घटाने के लिए लोग कई तरीकों को आजमाते हैं. एक्सरसाइज से लेकर दवाएं और आजकल इंटरमिटेट फास्टिंग का भी चलन बढ़ गया है. हालांकि एक और ऐसा तरीका है जो वजन घटाने में फायदेमंद माना जाता है. मेडिकल की भाषा में इसको टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग कहते हैं. यह खाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें दिनभर कभी भी खाने की बजाय भोजन करने का समय सीमित कर दिया जाता है. इसमें खाने का समय 8 से 10 घंटे के बीच का होता है और बाकी समय खाली पेट रहना होता है.

डॉ. बताती हैं कि टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग का सीधा मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति सुबह 9 बजे से शाम के 5 बजे तक खाना खाता है और उसके बाद अगली मील 16 घंटे बाद लेता है यानी शाम 5 बजे के बाद अगले दिन सुबह 9 बजे खाता है तो इसको टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग कहते हैं. इसमें 16 घंटे तक कुछ नहीं खाना होता, हां, पानी पी सकते हैं या फिर नारियल पानी और ग्रीन टी ले सकते हैं.

शरीर पर कैसे काम करती है टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग
डॉ. बताती हैं कि जब शरीर उपवास में रहता है तो इससे मेटाबॉलिक प्रोसस को आराम मिलता है. इससे शरीर में जमा फैट को ही एनर्जी समझकर शरीर यूज करने लगता है. फैट कम होता है. इस तरीके से खाना खाने से शरीर के पाचन संबंधी अंगों को 16 घंटे का आराम मिलता है. शरीर अपनी रिपेयर करता है इसमें भी जो एनर्जी यूज होती है उसमें भी फैट को एनर्जी समझकर शरीर यूज करता है. जिससे वजन कम करने में फायदा होता है. जब शरीर खुद को रिपेयर करता है तो कई बीमारियों में राहत भी मिलती है.

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किन बीमारियों में मिल सकता है फायदा
टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग का सबसे ज्यादा फायदा वजन को घटाने में मिलता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर का कैलोरी इनटेक कम हो जाता है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है. कई रिसर्च में दापा किया गया है कि खाने का ये तरीका टाइप- 2 डायबिटीज के मरीजों में शुगर लेवल कंट्रोल करने में भी काफी फायदेमंद है. इसके अलावा हार्ट की बीमारियों और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है. खाने का ये तरीका पेट को भी ठीक रखता है. हालांकि बिना अपने डॉक्टर की सलाह के इस तरह की डाइट को फॉलो नहीं करना चाहिए.

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किन लोगों के लिए नहीं है सही

  • गर्भवती महिलाएं
  • बुजुर्ग
  • एथलीट
  • जिनको कोई गंभीर बीमारी है
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