मणिपुर में फिर भड़की जातीय हिंसा: उखरुल में नागा-कुकी संघर्ष में 3 की मौत, कई घायल, इलाके में तनाव चरम पर
नई दिल्ली। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर एक बार फिर जातीय हिंसा की आग में झुलसता नजर आ रहा है। उखरुल जिला में तड़के हुई दो अलग-अलग गोलीबारी की घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में एक तांगखुल नागा और दो कुकी-जो समुदाय के सदस्य शामिल हैं। घटनाओं के बाद पूरे इलाके में तनाव गहरा गया है और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
पहली घटना सिनाकेइथेई गांव के पास सामने आई, जहां गश्त पर तैनात एक नागा ग्राम रक्षक पर घात लगाकर हमला किया गया। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि सशस्त्र कुकी उग्रवादियों ने इस वारदात को अंजाम दिया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। वहीं दूसरी ओर, मुल्लम गांव के पास दो कुकी-जो युवकों के शव बरामद हुए, जिससे हिंसा का दायरा और बढ़ गया।
दोनों समुदायों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कुकी संगठनों का दावा है कि तांगखुल नागा समूहों ने उनके गांवों पर हमला किया, जिसमें घरों को आग के हवाले किया गया और कई लोग घायल हुए। वहीं नागा पक्ष इन आरोपों को खारिज कर रहा है और उल्टा हमले का जिम्मेदार कुकी समूहों को ठहरा रहा है। इस टकराव ने क्षेत्र में अविश्वास और असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है।
इस बीच, NSCN (Isak-Muivah) से जुड़े एक धड़े ने भी बड़ा दावा किया है कि उसने सीमा पार से आए कुछ संदिग्ध उग्रवादियों को मार गिराया है। हालांकि, इस दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो और तस्वीरों को लेकर भी दोनों पक्षों में विवाद बना हुआ है, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
गौरतलब है कि उखरुल क्षेत्र मुख्य रूप से तांगखुल नागा बहुल है, लेकिन यहां कुकी-जो समुदाय की भी उपस्थिति है। फरवरी 2026 से दोनों समुदायों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है, जो अब हिंसक झड़पों में बदलता जा रहा है। प्रशासन ने हालात को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं, लेकिन स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है और किसी भी समय हालात बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।
