इलाज से पहले औपचारिकता! रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में इमरजेंसी सिस्टम फेल, बिना पर्ची इलाज नहीं, उठे बड़े सवाल

इलाज से पहले औपचारिकता! रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में इमरजेंसी सिस्टम फेल, बिना पर्ची इलाज नहीं, उठे बड़े सवाल

रायपुर: राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय की इमरजेंसी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां जीवन-मृत्यु से जूझ रहे मरीजों को भी तुरंत इलाज नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि पहले “पर्ची” यानी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। हालात ऐसे हैं कि सांसें टूटती रहें, लेकिन सिस्टम कागज मांगता है और इसी देरी में मरीजों की हालत और बिगड़ रही है।

रिपोर्ट में सामने आया कि एक्सीडेंट, सीने में तेज दर्द और गंभीर बीमारियों से जूझते मरीजों को भी इमरजेंसी वार्ड में सीधे प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। उन्हें पहले पर्ची काउंटर की लाइन में खड़ा होना पड़ता है। प्रतिदिन करीब 4 हजार मरीजों की ओपीडी और लगभग 200 इमरजेंसी केस संभालने वाले इस अस्पताल में यह प्रक्रिया मरीजों के लिए खतरा बनती जा रही है। कई मामलों में परिजन आरोप लगा रहे हैं कि पर्ची बनवाने के दौरान ही मरीजों की हालत गंभीर हो गई।

हैरानी की बात यह है कि अस्पताल स्टाफ इस व्यवस्था को “रिकॉर्ड जरूरी” बताकर सही ठहराता है। उनका कहना है कि बिना पंजीकरण के मरीज का डेटा दर्ज नहीं हो सकता। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस तर्क को सिरे से खारिज करते हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि इमरजेंसी में पहले प्राथमिक उपचार देना कानूनन और नैतिक रूप से अनिवार्य है, जबकि कागजी प्रक्रिया बाद में पूरी की जा सकती है। मेडिकल साइंस में इसे “गोल्डन ऑवर” कहा जाता है, जहां हर मिनट जीवन बचाने में निर्णायक होता है।

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जमीनी हकीकत और भी चौंकाने वाली है। एक मामले में पेट की गंभीर समस्या से जूझ रहे मरीज को स्ट्रेचर तक नहीं दिया गया और परिजन पर्ची के लिए लाइन में लगे रहे। वहीं, हादसे में घायल युवक, जिसके पैर से खून बह रहा था, उसे भी बाहर इंतजार करने को मजबूर किया गया। परिजनों की गुहार के बावजूद स्टाफ का जवाब एक ही था, “पहले पर्ची बनाइए।” 

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सवाल यह है कि अगर इस इंतजार में कोई जान चली जाए तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अस्पताल प्रबंधन ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच के आदेश की बात कही है। अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने स्पष्ट किया कि इमरजेंसी में पहले इलाज और बाद में औपचारिकताएं होनी चाहिए। लेकिन जमीनी स्तर पर जो तस्वीर सामने आ रही है, वह सिस्टम की बड़ी खामी को उजागर करती है। अगर तत्काल सुधार नहीं हुआ, तो यह व्यवस्था मरीजों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा साबित हो सकती है।

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