जोड़ों में दर्द कब नॉर्मल है, कब अर्थराइटिस? एक्सपर्ट से जानें

कई लोगों को अक्सर जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती है. वे इसे सामान्य थकान, ज्यादा चलने-फिरने या उम्र बढ़ने का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन हर बार जोड़ों में होने वाला दर्द साधारण नहीं होता. कई बार यह किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है. आजकल बदलती लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक एक्टिविटी की कमी और बढ़ती उम्र के कारण जोड़ों से जुड़ी समस्याएं पहले से ज्यादा देखने को मिल रही हैं. ऐसे में अगर दर्द बार-बार हो या लंबे समय तक बना रहे, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है.

सही समय पर कारण समझना और जरूरी जांच कराना जरूरी होता है. कई बार सामान्य कारणों से होने वाला दर्द कुछ समय में ठीक हो जाता है, जबकि कुछ स्थितियों में यह अर्थराइटिस की ओर इशारा कर सकता है. इसलिए जोड़ों में दर्द के सामान्य कारणों और अर्थराइटिस से जुड़े संकेतों के बारे में जानकारी होना जरूरी है. आइए जानते हैं.

जोड़ों में दर्द कब नॉर्मल है, कब अर्थराइटिस का संकेत?
डॉ. बताते हैं कि जोड़ों में दर्द कई कारणों से हो सकता है. कभी-कभी ज्यादा शारीरिक मेहनत, लंबे समय तक खड़े रहने, गलत तरीके से बैठने या व्यायाम के बाद भी दर्द महसूस हो सकता है. ऐसा दर्द आमतौर पर कुछ समय आराम करने पर ठीक हो जाता है और ज्यादा चिंता की बात नहीं होती. लेकिन जब जोड़ों में दर्द लंबे समय तक बना रहे, धीरे-धीरे बढ़े या रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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अगर दर्द के साथ जोड़ों में सूजन, जकड़न या चलने-फिरने में परेशानी होने लगे, तो यह अर्थराइटिस का संकेत हो सकता है. खासतौर पर सुबह उठते समय जोड़ों में ज्यादा जकड़न महसूस होना या दर्द का बार-बार लौट आना भी इस ओर इशारा कर सकता है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.

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अर्थराइटिस के लक्षण क्या हैं?
अर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें जोड़ों में सूजन और दर्द की समस्या हो सकती है. इसके सामान्य लक्षणों में जोड़ों में लगातार दर्द रहना, सूजन आना और चलने-फिरने में परेशानी शामिल है. कई लोगों को सुबह उठते समय जोड़ों में जकड़न महसूस होती है, जो कुछ समय तक बनी रह सकती है. प्रभावित जोड़ों में गर्माहट या लालिमा भी दिखाई दे सकती है.

समय के साथ दर्द बढ़ सकता है और हाथ, घुटने, कंधे या उंगलियों के जोड़ों पर असर पड़ सकता है. अगर इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो यह रोजमर्रा के कामों को भी प्रभावित कर सकता है. इसलिए ऐसे संकेत दिखने पर समय रहते जांच कराना जरूरी होता है.

अर्थराइटिस से इलाज और बचाव
अर्थराइटिस के इलाज में समय पर डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी होता है. सही दवाइयों, फिजियोथेरेपी और लाइफस्टाइल में बदलाव से इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. नियमित व्यायाम, संतुलित डाइट और वजन को कंट्रोल रखना जोड़ों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है.

लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचना और शरीर को एक्टिव रखना भी जरूरी है. इसके अलावा कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर फूड्स लेने से हड्डियों और जोड़ों को मजबूती मिल सकती है.

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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