राजधानी में बस्तर के मरीजों की फजीहत 5 एंबुलेंस में आए गंभीर मरीजों को डीकेएस अस्पताल ने भर्ती करने से किया इनकार

राजधानी में बस्तर के मरीजों की फजीहत 5 एंबुलेंस में आए गंभीर मरीजों को डीकेएस अस्पताल ने भर्ती करने से किया इनकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे बड़े दावों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है। बस्तर संभाग से इलाज की आस लेकर राजधानी रायपुर पहुंचे गंभीर मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि बस्तर से रिफर होकर आए पांच गंभीर मरीजों की एंबुलेंस डीकेएस मल्टीस्पेशलिस्ट अस्पताल की पार्किंग में घंटों से खड़ी हैं लेकिन उन्हें भर्ती करने वाला कोई नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही रायपुर के सबसे बड़े सरकारी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में देखने को मिली है। जानकारी के मुताबिक बस्तर के अलग अलग इलाकों से पांच गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रिफर किया गया था। ये सभी मरीज एंबुलेंस के जरिए डीकेएस अस्पताल पहुंचे। मरीज दर्द से तड़प रहे हैं और उनके परिजन अस्पताल प्रबंधन के सामने भर्ती करने की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन प्रबंधन का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति या डॉक्टर उन्हें अस्पताल के अंदर लेने को तैयार नहीं है।

मामला सिर्फ भर्ती न करने तक सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि जब एंबुलेंस चालकों और परिजनों ने डीकेएस के डॉक्टरों से फोन पर संपर्क किया तो उनका रवैया बेहद खराब था। डॉक्टरों ने मरीजों का हाल जानने के बजाय एंबुलेंस वालों पर ही गुस्सा उतारना शुरू कर दिया। फोन पर डॉक्टरों ने साफ तौर पर झिड़कते हुए कहा कि बस्तर से मरीजों को यहां क्यों लाते हो। यह जवाब सुनकर मरीज के परिजन और भी ज्यादा निराश और परेशान हो गए हैं।

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तड़के सुबह से लेकर अब तक पांचों एंबुलेंस अस्पताल की पार्किंग में ही खड़ी हैं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे ये मरीज डॉक्टरों के इंतजार में एंबुलेंस के अंदर ही पड़े हैं। इतनी लंबी दूरी तय करके रायपुर आने के बाद भी मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।

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इस घटना ने उन सभी दावों की पोल खोल दी है जिनमें प्रदेश के हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की बात कही जाती है। बस्तर जैसे दूर के इलाके से लोग इसी उम्मीद में रायपुर आते हैं कि यहां उन्हें अच्छी चिकित्सा मिलेगी। लेकिन राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल का यह रवैया आम जनता के लिए चिंता का विषय है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर डीकेएस जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों को ऐसे बाहर छोड़ दिया जाएगा तो गंभीर और गरीब मरीज आखिर इलाज के लिए कहां जाएंगे। प्रशासन को इस मामले में तुरंत ध्यान देने की जरूरत है ताकि मरीजों की जान बचाई जा सके।

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