मिलावट से गुड़ बना ‘जहर’, किडनी-लिवर पर खतरा! FSSAI के बताए तरीकों से चुटकियों में करें चेक

गुड़ एक ऐसा सुपरफूड है, जिसे हर मौसम में लोग खाना पसंद करते हैं. ये डाइजेशन के लिए इतना लाभकारी होता है कि एक्सपर्ट हर खाने के बाद गुड़ खाने की सलाह देते हैं. सर्दियों में तो इसका इस्तेमाल और बढ़ जाता है. कुछ लोग इसे चाय बनाने, लड्डू बनाने या हलवा बनाने के लिए भी करते हैं. वैसे तो गुड़ सेहत के लिए अच्छा ही माना जाता है. लेकिन परेशानी तब आती है जब आप नकली या केमिकल से भरे गुड़ का सेवन करें. जी हां, इस वक्त गुड़ की बढ़ती मांग को लेकर गुड़ में भी केमिकल का इस्तेमाल कर उसके स्वाद और रंग को बढ़ाया जा रहा है.

कई जगहों पर गुड़ को ज्यादा चमकदार बनाने, वजन बढ़ाने और लंबे समय तक खराब न होने देने के लिए चीनी का सिरका, पेंट जैसे रंग, सिंथेटिक डाई, चूना (लाइम) और केमिकल मिलाए जा रहे हैं. ऐसे गुड़ को खाना शरीर के लिए किसी जहर से कम नहीं है. इसका सीधा असर किडनी और लिवर पर पड़ सकता है. चलिए जानते हैं कि कैसे नकली गुड़ शरीर को नुकसान पहुंचाता है और आप इसकी पहचान कैसे कर सकते हैं.

मार्केट में बिक रहा केमिकल वाला गुड़
मार्केट में मिल रहे नकली गुड़ को पहचान काफी मुश्किल हो सकता है. क्योंकि ये दिखने में बिल्कुल ही असली गुड़ की तरह लगता है. हालांकि, अच्छी बात ये है कि FSSAI ( Food Safety and Standards Authority of India) ने नकली गुड़ को पहचाने के कुछ आसान तरीके बताए हैं, जो हम आपको इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं. लेकिन उससे पहले जान लेते हैं इससे होने वाले नुकसान क्या-क्या हैं ?

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गुड़ में हो रही इन केमिकल की मिलावट
फूड सेफ्टी विभाग के मुताबिक, गुड़ में कई वजन बढ़ाने के लिए वॉशिंग सोडा, चॉक पाउडर और सुनहरा रंग देने के लिए मेटानिल येलो जैसे केमिकल डाई का यूज किया जा रहा है. इसके अलावा सल्फर डाइऑक्साइड जैसे खतरनाक केमिकल का भी यूज किया जा रहा है. ये गुड़ सेहत के लिए किसी जहर से कम नहीं है. इससे पाचन तंत्र पर तो असर पड़ता ही है.

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केमिकल वाले गुड़ का सेहत पर असर
केमिकल वाले गुड़ का सेवन सेहत के लिए काफी खतरनाक है. इसमें जो सल्फर डाइऑक्साइड मिलाया जा रहा है, वो हड्डियों को कमजोर करता है और बोन डेंसिटी को भी घटाने का काम करता है. वहीं, इससे भी ज्यादा खतरनाक जो केमिकल है वो है मेटानिल येलो, यो एक सिंथेटिक कलर है, जिसे गुड़ को पीला रंग लाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. एक रिसर्च के मुताबिक, मेटानिल येलो कान, लिवर, आंत से लेकर दिल और नसों पर बुरा असर डालता है. साथ ही शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी बढ़ाने का काम करता है. चलिए जानते हैं कैसे आप नकली गुड़ की पहचान कर सकते हैं.

ऐसे करें नकली गुड़ की पहचान
वाटर टेस्ट – नकली गुड़ की पहचान करने के लिए आप वॉटर टेस्ट कर सकते हैं. इसके लिए एक गिलास में गुड़ का छोटा टुकड़ा पानी में घोलें. अगर पानी का रंग बदल जाता है तो समझ जाएं के इसमें रंग की मिलावट की गई है. क्योंकि शुद्ध गुड़ का रंग नहीं छुटता है.

वॉशिंग पाउडर की पहचान- FSSAI के मुताबिक, गुड़ में वॉशिंग पाउडर की मिलावट पहचानने के लिए आप गुड़ को पानी में डालें और नीचें देखें कि क्या सफेद-सफेद कुछ जमा हो रहा है या नहीं. अगर सफेद पाउडर गिरता है तो गुड़ में मिलावट की गई है.

शेप और टेस्ट – असली गुड़ सॉफ्ट और आसानी से टूट जाता है. लेकिन अगर गुड़ बहुत ज्यादा हार्ड या दानेदार है तो ये मिलावटी हो सकता है और इसमें चीनी या किसी केमिकल की मिलावट हो सकती है. वहीं, टेस्ट करके चेक करें. असली गुड़ मीठा होता है.

हथेली पर रखकर चेक करें- एक छोटा सा टुकड़ा गुड़ का लें और उसे हथेली पर रखकर रगड़ें. अगर गुड़ में से हल्का सा ऑयल निकलता है तो ये मिलावटी है. क्योंकि असली गुड़ में किसी भी तरह का कोई ऑयल नहीं निकलता है.

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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