छत्तीसगढ़ बजट 2026-27: 1.72 लाख करोड़ के संकल्प में विपक्ष की टोका-टाकी, कवासी लखma बोले- सुनते-सुनते थक गए; हंसी के ठहाकों के बीच पूरा हुआ भाषण

छत्तीसगढ़ बजट 2026-27: 1.72 लाख करोड़ के संकल्प में विपक्ष की टोका-टाकी, कवासी लखma बोले- सुनते-सुनते थक गए; हंसी के ठहाकों के बीच पूरा हुआ भाषण

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपए का वार्षिक बजट पेश किया। इस बार के बजट को 'संकल्प' की थीम पर केंद्रित किया गया है, जिसमें राज्य के सर्वांगीण विकास का रोडमैप तैयार किया गया है। वित्त मंत्री ने सदन में करीब 2 घंटे से अधिक समय तक बजट भाषण पढ़ा। हालांकि, लंबे भाषण के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बजाय हल्का-फुल्का माहौल और हास-परिहास अधिक देखने को मिला।

विपक्ष की टोका-टाकी 

बजट भाषण के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने कई बार टोका-टाकी की। जब वित्त मंत्री बजट के प्रावधानों को विस्तार से पढ़ रहे थे, तब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें बीच में टोकते हुए बजट को और अधिक स्पष्टता से समझाने का सुझाव दिया। इसी बीच पूर्व मंत्री कवासी लखमा के एक बयान ने सदन का माहौल पूरी तरह बदल दिया। लखमा ने चुटकी लेते हुए कहा कि बजट भाषण इतना लंबा है कि हम सुनते-सुनते थक गए हैं। इस टिप्पणी पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहित सदन के अन्य सदस्य अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

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 धर्मजीत ने दी अनुशासन की नसीहत

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जैसे-जैसे बजट भाषण आगे बढ़ा, कांग्रेस विधायकों की ओर से टोका-टाकी का सिलसिला तेज होने लगा। उस समय विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा के वरिष्ठ विधायक धर्मजीत सिंह विराजमान थे। स्थिति को देखते हुए उन्होंने विपक्षी सदस्यों को टोकते हुए कहा कि इतनी टोका-टाकी उचित नहीं है। वित्त मंत्री को अपना बजट भाषण निर्बाध रूप से पूरा करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट पर चर्चा के लिए अलग से समय निर्धारित है, इसलिए फिलहाल भाषण को शांतिपूर्वक सुना जाए।

वित्त मंत्री ने संकल्प थीम के माध्यम से स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। 1.72 लाख करोड़ रुपए के इस भारी-भरकम बजट में कृषि, बुनियादी ढांचे और शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। करीब 120 मिनट से ज्यादा चले इस भाषण में वित्त मंत्री ने कई बार विपक्षी हमलों का जवाब मुस्कुराहट के साथ दिया, जिससे सदन में अनावश्यक तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। आमतौर पर बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट देखने को मिलती है, लेकिन इस बार माहौल काफी अलग रहा। अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद विपक्षी विधायक शांत हुए और वित्त मंत्री ने अपना संबोधन पूरा किया। 

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