भारतमाला मुआवजा घोटाला: 11 जिलों में जांच तेज, इसी महीने ACB-EOW मार सकती है छापा; बड़े अफसर और नेता निशाने पर

भारतमाला मुआवजा घोटाला: 11 जिलों में जांच तेज, इसी महीने ACB-EOW मार सकती है छापा; बड़े अफसर और नेता निशाने पर

रायपुर | छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत हुए करोड़ों रुपए के मुआवजा घोटाले में अब निर्णायक कार्रवाई की तैयारी है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीमें शिकायतकर्ता से प्राप्त नए तथ्यों के आधार पर कड़ियां जोड़ रही हैं। जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस रायपुर और धमतरी के उन पटवारियों और राजस्व अधिकारियों पर है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर मुआवजे की राशि में हेरफेर की। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में इसी महीने कई रसूखदार सफेदपोशों और बड़े अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की जा सकती है।

जमीन के टुकड़े कर बढ़ा दिया मुआवजा, अब जिम्मेदारी तय होगी

जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि आखिर बड़े भूखंडों को कागजों पर छोटे-छोटे टुकड़ों में कैसे बांटा गया? नियमों के अनुसार, छोटे टुकड़ों में बंटी जमीन का मुआवजा दर अधिक होता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि इस विभाजन को रोकने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी और किसके आदेश पर सर्वे नंबरों में बदलाव किए गए। रायपुर से विशाखापट्टनम तक बन रहे 463 किमी लंबे फोरलेन कॉरिडोर के छत्तीसगढ़ वाले 124 किमी के हिस्से में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की पुष्टि हो रही है।

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इन 11 जिलों पर टिकी हैं जांच एजेंसियों की नजरें

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सूत्रों के अनुसार, केवल रायपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के उन सभी 11 जिलों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं जहां से यह कॉरिडोर गुजर रहा है। इन जिलों में भूमि अधिग्रहण, सर्वे नंबर परिवर्तन और भुगतान प्रक्रिया की विस्तृत स्क्रूटनी की जा रही है:

 

  •  रायपुर, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव।
  •  कोरबा, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव।
  •  दुर्ग, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा।

ED की सक्रियता ने बढ़ाई धड़कनें, दोबारा हो सकती है गिरफ्तारी

इस घोटाले की आंच केवल राज्य की एजेंसियों तक सीमित नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले से जुड़े दस्तावेज जुटा लिए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच की जा रही है। विशेष रूप से उन संदिग्ध अफसरों और बिचौलियों पर नजर रखी जा रही है जो फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। साक्ष्यों के आधार पर इनकी दोबारा गिरफ्तारी की प्रबल संभावना है।

जांच एजेंसियां दोषियों पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई कर सकें, इसके लिए सटीक और पुख्ता तथ्यों की जानकारी मेरे द्वारा निरंतर उपलब्ध कराई जा रही है। शासन को करोड़ों का आर्थिक नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी सूरत में बचने नहीं चाहिए।

 कृष्ण कुमार साहू, शिकायतकर्ता

 

प्रोजेक्ट प्रोफाइल: एक नजर में

 परियोजना: भारतमाला (रायपुर-विशाखापट्टनम फोरलेन)

  •   कुल लंबाई: 463 किलोमीटर
  •   छत्तीसगढ़ में हिस्सा: 124 किलोमीटर
  •  मुख्य आरोप: गलत तरीके से जमीन विभाजन कर करोड़ों का फर्जी मुआवजा उठाना।
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