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भारत की पहली व्यापक एंटी टेरर पॉलिसी ‘PRAHAAR’ लॉन्च, साइबर, ड्रोन और CBRN खतरों पर खास फोकस
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की पहली समग्र एंटी टेरर पॉलिसी ‘PRAHAAR’ (प्रहार) जारी कर दी है। यह रणनीतिक दस्तावेज आतंकवाद के बदलते स्वरूप साइबर हमलों, ड्रोन तकनीक, डार्क वेब नेटवर्क और क्रॉस-बॉर्डर मॉड्यूल को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। सरकार का कहना है कि नीति का उद्देश्य पारंपरिक और उभरते दोनों तरह के आतंकी खतरों से निपटने के लिए एकीकृत और समन्वित ढांचा तैयार करना है।
जमीन, जल और वायु, तीनों मोर्चों पर सतर्कता
नीति दस्तावेज के अनुसार, भारत को भूमि, जल और वायु तीनों क्षेत्रों में आतंकवादी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म, नस्ल, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता, बल्कि इसे एक वैश्विक सुरक्षा चुनौती के रूप में देखता है।
साइबर, डार्क वेब और क्रिप्टो नेटवर्क पर नजर
‘PRAHAAR’ में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, इंस्टेंट मैसेजिंग एप्स, एन्क्रिप्शन टूल्स, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट के जरिए फंडिंग और ऑपरेशनल गाइडेंस की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई गई है। दस्तावेज के मुताबिक, आतंकी संगठन लॉजिस्टिक्स, भर्ती और फंडिंग के लिए ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल नेटवर्क का सहारा ले रहे हैं।
CBRN और ड्रोन तकनीक बना नई चुनौती
रणनीति में CBRNED (Chemical, Biological, Radiological, Nuclear, Explosive, Digital) सामग्री तक पहुंच और उसके दुरुपयोग की कोशिशों को गंभीर खतरा बताया गया है। साथ ही ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी उभरती तकनीकों के दुरुपयोग की आशंका पर भी विशेष जोर दिया गया है।
युवाओं के रेडिकलाइजेशन पर फोकस
गृह मंत्रालय ने चेताया है कि आतंकी संगठन भारतीय युवाओं को प्रभावित और भर्ती करने की कोशिश कर रहे हैं। पहचान के बाद ऐसे मामलों में ग्रेडेड पुलिस कार्रवाई का प्रावधान है। नीति में सामाजिक और धार्मिक नेताओं, मॉडरेट प्रचारकों तथा एनजीओ की भूमिका को भी अहम बताया गया है, जो जागरूकता और डि-रेडिकलाइजेशन अभियानों में योगदान दे सकते हैं।
वैश्विक नेटवर्क और स्लीपर सेल का खतरा
दस्तावेज में Al-Qaeda और Islamic State of Iraq and Syria जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि स्लीपर सेल के जरिए भारत में हिंसा भड़काने की कोशिशें की गई हैं। साथ ही ट्रांसनेशनल आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग को भी आवश्यक बताया गया है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समन्वय पर जोर
नीति में कहा गया है कि विदेश से संचालित आतंकी मॉड्यूल स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स पर निर्भर होकर हमले की साजिश रचते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर कड़े उपायों के साथ-साथ वैश्विक साझेदारी और इंटेलिजेंस शेयरिंग को भी मजबूत करना जरूरी है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
