ज्यादा स्क्रीन टाइम से सिर्फ आंखे ये नहीं शरीर के इन हिस्सों पर भी पड़ता है बुरा असर

आज की डिजिटल दुनिया में स्क्रीन हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है. सुबह उठते ही मोबाइल, दिनभर लैपटॉप या कंप्यूटर, और रात को टीवी या फिर फोन…हमारी जिंदगी मानों अब स्क्रीन के इर्द-गिर्द घूमने लगी है. आमतौर पर जब ज्यादा स्क्रीन टाइम की बात होती है, तो सबसे पहले दिमाग में आंखों की समस्या आती है. जैसे जलन, धुंधलापन या आंखों का सूखना. लेकिन सच्चाई ये है कि स्क्रीन का असर सिर्फ आंखों पर ही नहीं बल्कि शरीर के भी कई हिस्सों पर पड़ता है. लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने की आदत धीरे-धीरे पूरे शरीर पर नेगेटिव इंपेक्ट डालती है.

हालांकि, अमूमन लोग इससे अंजान है. ऐसे में हर किसी को ये जानना बेहद जरूरी है कि, ज्यादा स्क्रीन टाइम से सिर्फ आंखों को ही नहीं बचाना ही बल्कि शरीर के कई हिस्सों का भी खास ख्याल रखना है. चलिए इस आर्टिकल में आपको भी बताते हैं कि, ज्यादा स्क्रीन टाइम बॉडी के कौन-कौन से हिस्सों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है?

ब्रेन पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर
लगातार स्क्रीन देखने से सिर्फ आंखें ही नहीं बल्कि ब्रेन पर भी बुरा असर पड़ता है. हार्वर्ड की साल 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिकस लगातार स्क्रीन देखने से मानसिक थकान (Mental Fatigue) बढ़ती है. इससे कॉन्सेंट्रेशन लेवल कम होता है और याददाश्त जाने तक का खतरा बढ़ जाता है. बच्चों के दिमाग के लिए स्क्रीन टाइम बेहद खतरनाक मानी जाती है. ज्यादा सोशल मीडिया/रील्स से डोपामिन ओवरलोड होता है, जिससे फोकस कम और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. बच्चों में ये ब्रेन डेवलपमेंट को भी प्रभावित कर सकता है.

Read More महिलाएं पीसीओडी की बीमारी से बचने के लिए क्या करें?

स्लीप सिस्टम बिगड़ना
रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा स्क्रीन टाइम, खासकर रात में, हमारी नींद की बॉडी क्लॉक को गड़बड़ा देता है. मोबाइल, लैपटॉप और टीवी से निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को ये संकेत देती है कि अभी दिन है, जिससे मेलाटोनिन हार्मोन (जो नींद लाने में मदद करता है) कम बनने लगता है. नतीजा ये होता है कि नींद आने में देर लगती है, नींद गहरी नहीं होती, और बार-बार नींद टूटती है. यही वजह है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम स्लीप सिस्टम बिगाड़ देता है.

Read More 70-80 के दशक का फास्ट फूड कल्चर अब बन रहा जानलेवा, Gen X की 21% महिलाओं को है प्रोसेस्ड फूड की लत

गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर भी असर
स्क्रीन का ज्यादा यूज गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर भी बुरा असर डालता है. दरअसल, मोबाइल झुककर देखने से टेक्स्ट नेक सिंड्रोम का रिस्क बढ़ जाता है. सर्वाइकल दर्द, गर्दन जकड़ना जैसी समस्याएं होती हैं. इसके अलावा लंबे समय तक बैठने से लोअर बैक पेन और यहां तक की रीढ़ की समस्या भी बढ़ सकती है.

पैरों की मांसपेशियों के लिए भी नहीं है अच्छा
आपको जानकर हैरानी होगी कि, स्क्रीन टाइम से पैरों पर भी असर पड़ता है. इससे पैर सुन्न हो जाते हैं, झनझनाहट और वेरिकोज वेन्स का खतरा भी बढ़ सकता है. दरअसल, घंटों बैठे रहने से ब्लड सर्कुलेशन स्लो हो जाता है, जिससे ये सब समस्याएं हो सकती हैं. वहीं, घंटों बैठे रहने से घुटने की मोवमेंट कम होती है और ये कमजोर हो सकते हैं. जिसकी वजह से घुटने में दर्द होने लगता है. कुछ समय बाद ये बढ़ भी सकता है.

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

More News

क्रिकेट के 73 नियमों में ऐतिहासिक बदलाव: टेस्ट क्रिकेट अब नहीं रहेगा पहले जैसा, आखिरी ओवर और हिट विकेट के बदले नियम

राज्य

क्रिकेट के 73 नियमों में ऐतिहासिक बदलाव: टेस्ट क्रिकेट अब नहीं रहेगा पहले जैसा, आखिरी ओवर और हिट विकेट के बदले नियम क्रिकेट के 73 नियमों में ऐतिहासिक बदलाव: टेस्ट क्रिकेट अब नहीं रहेगा पहले जैसा, आखिरी ओवर और हिट विकेट के बदले नियम
नई दिल्ली: टी20 वर्ल्ड कप 2026 से ठीक पहले क्रिकेट की दुनिया में बड़ा भूचाल आया है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब...
बैटल ऑफ गलवान के शहीद कर्नल बाबू की मां उतरीं राजनीति में, BRS से दाखिल किया नामांकन
उधमपुर मुठभेड़: जैश के 2–3 आतंकी घेरे में, जम्मू-कश्मीर में 100 से अधिक अभियान जारी
लोकसभा में हंगामा: स्पीकर की ओर फेंके गए कागज, विपक्ष के 8 सांसद पूरे सत्र के लिए निलंबित
अटल टनल–रोहतांग पर कहर बनकर टूटा एवलांच, तीन जगह हिमस्खलन, लाहौल-मनाली मार्ग पर अफरा-तफरी