दया क्या अपने बचने के लिए ED में फंसे लोग मुख्यमंत्री को फंसा रहे है?

दया क्या अपने बचने के लिए ED में फंसे लोग मुख्यमंत्री को फंसा रहे है?

दया क्या अपने बचने के लिए ED में फंसे लोग मुख्यमंत्री को फंसा रहे है? रायपुर : आईएएस समीर विश्नोई, सूर्यकान्त तिवारी, मुख्यमंत्री की डिप्टीसेक्रेटरी सौम्या चौरसिया, कारोबारी सुनील अग्रवाल, रविकांत तिवारी, खनिज अधिकारी शिवशंकर नाग, संदीप नायक सहित जमीन दलाल दीपेश टांक को घेरे में लिया तो सभी गिरफ्तार हो कर जेल चले गए।500 […]

दया क्या अपने बचने के लिए ED में फंसे लोग मुख्यमंत्री को फंसा रहे है?


रायपुर : आईएएस समीर विश्नोई, सूर्यकान्त तिवारी, मुख्यमंत्री की डिप्टीसेक्रेटरी सौम्या चौरसिया, कारोबारी सुनील अग्रवाल, रविकांत तिवारी, खनिज अधिकारी शिवशंकर नाग, संदीप नायक सहित जमीन दलाल दीपेश टांक को घेरे में लिया तो सभी गिरफ्तार हो कर जेल चले गए।
500 करोड़ का कोयला परिवहन घोटाला हुआ है ऐसा इडी मान रही है।

आयकर विभाग द्वारा जप्त डायरी, व्हाट्सएप चैट के आधार औऱ करोड़ो रूपये नगद, सोना ,आभूषण के अलावा 2019 के बाद खरीदे गए लगभग 200 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति के मामले को ईडी को दिया गया था। आयकर औऱ ईडी ने कोयला मामले में जितनो को भी गिरफ्तार किया। किसी ने भी ये आरोप नहीं लगाया कि ईडी के अधिकारियों के द्वारा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का नाम लेने का दबाव बनाया गया है।

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यहां तक के आईएएस अनिल टुटेजा, जो मुख्यमंत्री के बहुत करीबी है, उन्होंने भी ये बात नही कही।
2000 करोड़ शराब घोटाले के मामले में ईडी ने शराब डिस्टलर सहित शराब कारोबारी, मिडिल में अनवर ढेबर, नितेश पुरोहित, पप्पू ढिल्लन सहित ज्ञाता अमरपति त्रिपाठी को जांच के लिए बुलावा भेजा तो अचानक ही मुख्यमंत्री के नाम लेने की चर्चा होने लगी।

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पूरे प्रदेश को इस बात की जानकारी है कि ईडी ने आबकारी विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों को संमन्स भेजा था। इनको आबकारी विभाग के दो उच्च अधिकारियों ने बुलाया था सर्किट हाउस और मुख्यमंत्री निवास में मीटिंग के नाम पर। एक अधिकारी तो ईडी के रिमांड में तीसरी बार गया है तो दूसरे को सिर्फ सम्मन ही जारी हुआ है।
बताया जाता है कि केंद्रीय सेवा में काम करने वालो को 5 साल के लिए राज्यो में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है। आबकारी विभाग वाले संचार विभाग के अधिकारी को 7 साल हो गए


केंद्र सरकार के तगादे के बाद भी नही जा रहे थे। दूसरे की सेवानिवृत्ति हो गयी थी। संविदा में आ गए। ये दोनों अधिकारी बुरी कदर से फंसे औऱ जिले के आबकारी अधिकारियों को भी फंसा दिए है । खास कर उन जिले के अधिकारी सीधे तौर पर भविष्य में गिरफ्तार होंगे जो डिस्टरलरी वाले जिले के प्रमुख रहे हैं।
सोमवार की मीटिंग में दो अधिकारियों ने ही तय किया था कि समवेत स्वर में एक ही बात कहना है कि ईडी मुख्यमंत्री का नाम लेने के लिए कह रही है।
सांप छुछुन्दर की स्थिति में आबकारी अधिकारियों ने वही बोला, जो बोलवाया गया था। आबकारी अधिकारियों में भी 5 खेमा है। इनमें से दो खेमा मलाई विहीन रहा है वे बाहर आ कर बता दिए कि प्रायोजित बैठक का सार माजरा क्या था।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी झांसा देकर ये बताना कि ईडी मुख्यमंत्री का नाम लेने का दबाव बना रही है। सभी आबकारी अधिकारी को अमरपति त्रिपाठी लगातार मेसेज कर रहे थे कि ईडी आफिस नही जाना है। जब कोई आबकरी अधिकारी गया ही नही तो तो नाम लेने का दबाव कैसे बना ? ये सोचने वाली बात है। जब कोयला घोटाले से जुड़े मुख्यमंत्री के निकटतम अधिकारी, कारोबारी मुख्यमंत्री के नाम लेने की बात नही कहे तो शराब घोटाले में नाम कैसे आ सकता है?
आबकारी विभाग के सर्वेसर्वा जानते थे कि मुख्यमंत्री का विश्वास जीतने के लिए कोई न कोई हथकंडा अपनाना ही पड़ेगा। इसीलिये सीधे सुप्रीम कोर्ट चले गए। कोर्ट ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि याचिका स्वीकार करने का कोई अर्थ नहीं निकाला जाए। सुप्रीम कोर्ट के इसके पहले के निर्णय को जिस तरह से समाचार पत्र और मीडिया में परोसा गया उसकी प्रतिक्रिया सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणी में साफ है। आबकारी विभाग के एक अधिकारी , वाणिज्य विभाग के बड़े अधिकारी के समान ही संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए शरण लिए है। 29 तारीख को सुनवाई होनी है ।ये बात तो तय है कि थोड़े समय के लिए राहत मिल भी जाये लेकिन देर सबेर वही होना है जो औरों का हो चुका है।

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