मेट्रो प्रोजेक्ट की जमीनों में साहब का भारी निवेश, क्या दांव पर लगेगी सुशासन की साख?
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सत्ता और नौकरशाही के गलियारों में इन दिनों एक दिलचस्प चर्चा जोरों पर है। चर्चा ऐसी कि नया रायपुर के मंत्रालय में बैठे बाबुओं से लेकर राजनीतिक दिग्गजों तक के कान खड़े हो गए हैं। मामला राजधानी से लेकर उन तमाम इलाकों के जमीन कारोबार से जुड़ा है, जहां-जहां भविष्य के 'मेट्रो प्रोजेक्ट' या बड़े विकास कार्यों की सुगबुगाहट चल रही है।
सुना है कि इन प्राइम लोकेशन्स पर जमीन के बड़े-बड़े खेल चल रहे हैं। लेकिन असली ट्विस्ट ये है कि इन जमीन कारोबारियों के पीछे प्रदेश के एक बेहद 'वरिष्ठ आईएएस' (IAS) अधिकारी का मोटा पैसा इन्वेस्टेड है। चर्चा तो यहां तक है कि साहब ने अपना पूरा ब्लैक एंड व्हाइट का 'इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो' इन चुनिंदा जमीन कारोबारियों के भरोसे छोड़ दिया है। जहां भी प्रोजेक्ट शुरू होना होता है, उसकी इनसाइड इंफॉर्मेशन पहले ही लीक हो जाती है और वहां कौड़ियों के दाम पर जमीनें उठा ली जाती हैं।
अब आप ही सोचिए, जब सिस्टम में बैठकर नीति बनाने वाले अधिकारी ही बिल्डरों के साथ 'साइलेंट पार्टनर' बन जाएं, तो फिर क्या ही कहा जाए! लेकिन, इस पूरी कहानी में सबसे बड़ी चिंता का विषय प्रदेश सरकार की छवि है। राज्य में फिलहाल सुशासन का झंडा बुलंद है और प्रदेश के मुखिया यानी अपने सीधे-साधे और साफ-सुथरी छवि वाले मुख्यमंत्री जी दिन-रात जनता की भलाई में लगे हैं। मंत्रालय की कैंटीन से लेकर कॉफी हाउस तक यही फुसफुसाहट है कि अगर समय रहते इस अफसरशाही और बिल्डर नेक्सस पर ब्रेक नहीं लगा, तो इसका सीधा नुकसान मुख्यमंत्री जी की बेदाग छवि को होगा।
जानकारों का कहना है कि सुशासन की सरकार को बिना देरी किए इस उड़ती हुई खबर पर संज्ञान लेना चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह तत्काल प्रभाव से ईडी (ED), सीबीआई (CBI), एसीबी (ACB) और ईओडब्ल्यू (EOW) जैसी जांच एजेंसियों को एक्टिव करे। अगर इन जमीन कारोबारियों और उनके पीछे छिपे उस रसूखदार आईएएस अधिकारी के बैंक खातों और संपत्तियों की बारीकी से जांच हो जाए, तो एक बहुत बड़ा भंडाफोड़ हो सकता है।
अगर जल्द ही इस 'जमीन और पावर के कॉकटेल' पर हथौड़ा नहीं चला, तो आने वाले समय में विपक्ष को बैठे-बिठाए भ्रष्टाचार का एक बड़ा मुद्दा मिल जाएगा। फिर बेवजह सीधे-साधे मुख्यमंत्री जी और उनकी सुशासन वाली सरकार को बदनाम करने की कोशिशें होंगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का चाबुक चलाती है, या फिर यह चर्चा सिर्फ मंत्रालय के गलियारों की हवा बनकर ही रह जाएगी!
