हादसों के बाद जागता है प्रशासन: रायपुर में बिना रिकार्ड चल रहे हजार कोचिंग सेंटर, जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति

हादसों के बाद जागता है प्रशासन: रायपुर में बिना रिकार्ड चल रहे हजार कोचिंग सेंटर, जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति

रायपुर। लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद रायपुर का जिला प्रशासन और नगर निगम अब नींद से जागा है। जब किसी दूसरे शहर में जान जाती है, तब जाकर यहां के अफसरों को सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्था की याद आती है। केंद्र सरकार ने 16 जनवरी 2024 को ही कोचिंग सेंटरों के नियमन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए थे। ताज्जुब की बात यह है कि तीन साल बाद भी राज्य में नियमन का आदेश केवल फाइलों तक ही सीमित रह गया। इतने लंबे समय में न तो कोई कानून बन पाया और न ही पंजीयन व्यवस्था लागू हो सकी।

राजधानी रायपुर में छोटे-बड़े मिलाकर करीब एक हजार कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। यह बात हैरान करने वाली है कि शिक्षा विभाग के पास इन संस्थानों की वास्तविक संख्या तक का कोई रिकॉर्ड नहीं है। शहर के अधिकांश बड़े संस्थान केवल नगर निगम का गुमाश्ता लाइसेंस और फायर विभाग की एनओसी लेकर अपना काम चला रहे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में छोटे कोचिंग सेंटर तो बिना किसी वैधानिक अनुमति और बिना किसी सुरक्षा मानक के गलियों में धड़ल्ले से चल रहे हैं। जब कोई दुर्घटना होती है, तभी यह पूरी व्यवस्था हरकत में आती है।

हादसे के बाद प्रशासन ने कोचिंग सेंटरों में औचक निरीक्षण और कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच दल भवन की स्थिति और अग्निशमन व्यवस्था का परीक्षण कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से अधूरी है। जिला प्रशासन द्वारा गठित इस जांच दल में नगर निगम और अग्निशमन विभाग के अधिकारी तो शामिल हैं, लेकिन विद्युत सुरक्षा विशेषज्ञों को शामिल ही नहीं किया गया है। देशभर में अधिकांश आगजनी की घटनाएं शॉर्ट सर्किट, ओवरलोडिंग और खराब वायरिंग के कारण ही होती हैं। गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों के बढ़ते लोड के कारण अंडरग्राउंड केबल और वायरिंग पर दबाव बढ़ता है, जिससे हादसों की आशंका अधिक रहती है। बिना इलेक्ट्रिकल एक्सपर्ट के यह जांच कैसे पूरी होगी, यह समझ से परे है।

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जिला प्रशासन ने निरीक्षण के लिए जो 12 बिंदुओं का प्रारूप तैयार किया है, उसमें अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और कार्यशीलता, फायर विभाग का अनापत्ति प्रमाण-पत्र, विद्युत वायरिंग एवं वितरण पैनल की जांच, खुले तार व अवैध बिजली कनेक्शन की पड़ताल शामिल है। इसके अलावा पर्याप्त वेंटिलेशन, प्रकाश व्यवस्था, वैकल्पिक निकासी द्वार, अवरोधमुक्त आपातकालीन मार्ग, सुरक्षा संकेतक, विद्यार्थियों और कर्मचारियों की मॉक ड्रिल, भवन क्षमता के अनुरूप विद्यार्थियों की संख्या, आपदा प्रबंधन संसाधन और प्राथमिक उपचार किट जैसी चीजों का परीक्षण होना है।

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रायपुर नगर निगम के आयुक्त संबित मिश्रा का कहना है कि आदेश जारी होने के बाद कोचिंग संस्थानों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जा रहा है और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की टीम सुरक्षा मानकों का परीक्षण कर रही है। लेकिन सवाल वही है कि जब तक शिक्षा विभाग के पास कोचिंग सेंटरों की वास्तविक संख्या ही नहीं है, तब तक 12 बिंदुओं पर हो रही यह कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित नजर आती है। फाइलों में दबे नियमन को जमीन पर लाना होगा, अन्यथा यह जांच सिर्फ एक दिखावा ही मानी जाएगी।

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