नहीं रहीं पद्म विभूषण तीजन बाई, पंडवानी की अमर आवाज हुई खामोश

नहीं रहीं पद्म विभूषण तीजन बाई, पंडवानी की अमर आवाज हुई खामोश

दुर्ग। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली प्रख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मान से अलंकृत तीजन बाई का आज तड़के रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उपचाराधीन थीं। तड़के करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनकी बहू रेणु देशमुख ने की।

तीजन बाई के निधन की खबर सामने आते ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। कला, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने इसे भारतीय लोककला के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उनके जाने के साथ पंडवानी गायन की एक स्वर्णिम विरासत का युग भी मानो समाप्त हो गया।

लंबे समय से थीं अस्वस्थ
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य खराब होने के बाद तीजन बाई को रायपुर एम्स में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की लगातार निगरानी में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। परिवार के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम गनियारी में किया जाएगा, जहां उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

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लोककला को दिलाई वैश्विक पहचान
तीजन बाई ने अपने दमदार गायन और अद्भुत मंचीय प्रस्तुति से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों तक पहुंचाया। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में प्रस्तुत कर इस लोककला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनका जीवन छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। आने वाली पीढ़ियों के लिए वे सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

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शोक संदेशों का लगा तांता
तीजन बाई के निधन पर मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों, कलाकारों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया। सभी ने उन्हें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का सबसे मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि उनका जाना केवल प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री ने ली थी स्वास्थ्य की जानकारी
तीजन बाई की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उनके परिजनों से फोन पर बातचीत कर स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो और उन्हें सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को उपचार की लगातार निगरानी करने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख सुनिश्चित करने तथा बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए थे। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद रविवार को तीजन बाई ने अंतिम सांस ली।

तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के इतिहास में एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा। उनकी आवाज, उनकी शैली और पंडवानी के प्रति उनका समर्पण हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।

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