23 करोड़ के टेंडर में बड़ा खेल रद्द सर्टिफिकेट से ठेकेदार ने हासिल किया ठेका अब विधानसभा में उठेगा मुद्दा
रायपुर।छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। जशपुर जिले की पमशाला एनीकट योजना के लगभग 23 करोड़ रुपये के टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री से की गई है। आरोप है कि जिस ठेकेदार के सर्टिफिकेट को विभाग खुद रद्द कर चुका था उसी रद्द दस्तावेज के सहारे ठेकेदार ने नया टेंडर हासिल कर लिया। विभाग ने इसे मंजूरी भी दे दी। अब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और मानसून सत्र में इस पर विधानसभा में सवाल उठने की तैयारी है।
छिपाई गई डिग्रेडेशन की जानकारी
मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र के अनुसार लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार अशोक कुमार मित्तल को अ वर्ग से ब वर्ग में डिग्रेड कर दिया था। यह कार्रवाई 14 जुलाई 2025 से 15 अगस्त 2029 तक के लिए की गई थी। आरोप है कि ठेकेदार ने डिग्रेडेशन की इस जानकारी को विभाग से छिपाया और 10 दिसंबर 2025 को अ वर्ग का प्री बिड क्वालिफिकेशन सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिया। इसके बाद ठेकेदार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत के 22 जनवरी 2026 के आदेश के बाद वह फिर से अ वर्ग में शामिल हो गया।
शिकायत के बाद रद्द हुआ था सर्टिफिकेट
ठेकेदार द्वारा डिग्रेडेशन के समय गलत तरीके से सर्टिफिकेट लेने का मामला सामने आने पर सरगुजा संभाग के कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने 19 फरवरी 2026 को मुख्य अभियंता के पास इसकी शिकायत की। विभाग ने मामले की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर 27 अप्रैल 2026 को ठेकेदार अशोक कुमार मित्तल के प्री बिड क्वालिफिकेशन सर्टिफिकेट को 31 अक्टूबर 2026 तक के लिए रद्द कर दिया।
रद्द दस्तावेज से पा लिया 23 करोड़ का काम
विवाद का मुख्य कारण यह है कि जिस सर्टिफिकेट को विभाग ने रद्द कर दिया था ठेकेदार ने उसी का इस्तेमाल जशपुर जल संसाधन संभाग के एक बड़े टेंडर में कर लिया। यह टेंडर क्रमांक 183619 था जो पमशाला एनीकट योजना के लिए निकाला गया था। इसकी लागत 22 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक है। न्यूनतम दर होने का हवाला देते हुए शासन स्तर पर 10 जून 2026 को यह टेंडर उसी ठेकेदार के नाम पर स्वीकृत भी कर दिया गया।
हाईकोर्ट और विधानसभा जाने की चेतावनी
अब कांट्रेक्टर एसोसिएशन सरगुजा संभाग ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अनुबंध की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। पत्र में चेताया गया है कि अगर विभाग इस टेंडर का अनुबंध करता है तो इसके खिलाफ हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल की जाएगी। इसके अलावा आने वाले मानसून सत्र में विधानसभा के भीतर भी यह मामला उठेगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी जल संसाधन मंत्रालय की होगी। एसोसिएशन ने टेंडर में लगाए गए सभी दस्तावेजों की जांच कर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग रखी है।
