रिटायर्ड जनरल मैनेजर से 50 दिन में 2.83 करोड़ की ठगी: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सोनिया हंसपाल बनीं शिकार

रिटायर्ड जनरल मैनेजर से 50 दिन में 2.83 करोड़ की ठगी: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सोनिया हंसपाल बनीं शिकार

रायपुर। राजधानी की सफायर ग्रीन कॉलोनी निवासी सोनिया हंसपाल (62), जो निक्को कंपनी की रिटायर्ड जनरल मैनेजर हैं, डिजिटल अरेस्ट नाम से चर्चित बड़े फ्रॉड की शिकार हो गई हैं। ठगों ने उन्हें व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर ऑनलाइन फ्रॉड में शामिल होने का डर दिखाया और दिल्ली पुलिस द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का भय दिखाकर अपने जाल में फंसा लिया। सोनिया को 50 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया और इस दौरान 21 मई से 10 जुलाई के बीच उनसे 2 करोड़ 83 लाख 65 हजार रुपये ठग लिए गए। अपनी जमा पूंजी गंवाने के बाद वे सदमे में आ गईं और फिर पुलिस के पास पहुंचीं।

मामले में सोनिया की नासमझी साफ झलकती है। एक बड़ी स्टील कंपनी में उच्च पद पर रही अधिकारी होने के बावजूद, उन्हें यह पता होना चाहिए था कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) करता है, न कि पुलिस। ठगी की जांच पुलिस करती है। उन्हें तत्काल कानूनी सलाह लेनी चाहिए थी या किसी जानकार से संपर्क करना था, क्योंकि कोई भी सरकारी एजेंसी 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती।

सोनिया ने आपबीती बताते हुए कहा, 21 मई की शाम को मैं घर पर थी। तभी स्टेट बैंक के कस्टमर केयर के नाम से एक फोन आया। सामने वाले ने कहा कि क्रेडिट कार्ड का पैसा बचा हुआ है और इसका भुगतान तत्काल करें, नहीं तो मेरा नंबर दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इतना कहकर उसने फोन काट दिया। 22 मई की सुबह 11:15 बजे 7568775489 नंबर से व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आया। उस पर 'दिल्ली साइबर विंग' लिखा हुआ था, लेकिन सामने वाले का कैमरा बंद था। आवाज आई कि मैं दिल्ली पुलिस से बात कर रहा हूं। आपके पास कितने फोन हैं, सभी के नंबर दो। इस पर मैंने अपने दोनों फोन नंबर दे दिए। फिर 8854037798 नंबर से मेरे दूसरे नंबर पर व्हाट्सएप कॉल आया।'

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उन्होंने आगे बताया, 'उस कॉल पर मेरी व्यक्तिगत जानकारी ली गई, जैसे कितने खाते हैं, उनमें कितना बैलेंस है, कितनी प्रॉपर्टी है, कितनी ज्वेलरी है और घर पर कौन-कौन है। यह पूरी जानकारी मैंने उन्हें दे दी। इसके बाद मुझे डराया गया कि मेरा नाम मनी लॉन्ड्रिंग में है और मेरे आधार कार्ड से कई बैंक खाते खुले हैं। मुझे कुछ जानकारी दी जाएगी, जिसमें मुझे आरटीजीएस करना पड़ेगा, और रिजर्व बैंक से वेरिफाई करके पैसा वापस कर दिया जाएगा। उसके बाद 23 मई को 6.15 लाख रुपये की पहली किश्त जमा कराई गई। इसके बाद लगातार किस्तों में पैसे मांगे गए।'

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सोनिया ने बताया कि 13 जून को उन्होंने 25 लाख रुपये जमा किए। इस तरह अलग-अलग किश्तों में 10 जुलाई तक कुल 2.83 करोड़ रुपये ठगों के खाते में जमा करा दिए गए। ठगों ने सोनिया को धमकी दी थी कि वह निगरानी में है और इसकी पुलिस को सूचना नहीं देनी है, न ही किसी से चर्चा करनी है। उन्हें घर से बाहर नहीं जाना था और हर गतिविधि की व्हाट्सएप पर सूचना देनी थी। ठगों के इन पैंतरों से सोनिया बहुत डर गई थीं। वे रोज व्हाट्सएप पर एक-एक जानकारी देती थीं, बाहर जाने पर लोकेशन भेजती थीं, और घर पर कौन आया, यह भी बताती थीं। यह सिलसिला 50 दिनों तक चला।

छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट के मामले

छत्तीसगढ़ में पिछले एक साल के भीतर 'डिजिटल अरेस्ट' की 12 घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें 12 पीड़ितों से 168 करोड़ रुपये की ठगी हुई है।

 10 नवंबर 2024 को एमवी लक्ष्मी को 'अरेस्ट' कर 58 लाख रुपये की ठगी की गई।

 11 नवंबर को डॉ. एसके उपाध्याय को 'अरेस्ट' कर 4.50 लाख रुपये की ठगी की गई।

 14 नवंबर को एलआईसी एजेंट से 6.50 लाख रुपये की ठगी हुई।

ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

 फोन फॉर्मेट करें और एंटीवायरस डालें।

  व्हाट्सएप पर 'साइलेंस अननोन वीडियो कॉल' सेटिंग को एक्टिव करें।

 जो लोग अपडेट नहीं रहते, उनके 'डिजिटल अरेस्ट' होने का खतरा ज्यादा है।

  जिस नंबर से कॉल आ रहा है उसे ट्रैक करें, ज्यादातर कॉल विदेश से होते हैं।

  जितना ज्यादा समय बीतेगा, पैसा वापस आने के चांसेज उतने कम होंगे।

 कई बार पैसा विदेशों में भी भेजते हैं, जल्द रिपोर्ट करने से फायदा होता है।

 पुलिस, ईडी, सीबीआई छापा मारती है या फिर समन जारी करती है, फोन पर किसी को अरेस्ट नहीं किया जाता है और न ही धमकी दी जाती है।

 मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हवाला देकर पुलिस के नाम से फोन करे तो समझें फ्रॉड है।

 कॉल आने पर परिवार से बात करें, नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत करें या कानूनी सलाह लें।

  कॉल करने वाले का बताया कोई ऐप डाउनलोड न करें, यदि कर दिया है तो तुरंत डिलीट करें।

शिक्षिका भी बनीं शिकार, 8.5 लाख की ठगी

टिकरापारा की दावड़ा कॉलोनी निवासी एक शिक्षिका मनोरमा शर्मा भी 9 जुलाई को 'डिजिटल अरेस्ट' की शिकार हुई हैं। उन्हें 536 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में नाम आने का झांसा दिया गया। ठगों ने धमकी दी कि उनके नाम से मुंबई में 5 लाख रुपये देकर केनरा बैंक में खाता खोला गया है, जिसमें 200 करोड़ रुपये जमा हुए हैं और उन्हें 20 लाख रुपये कमीशन दिया गया है। इसलिए उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' किया जाता है। कार्रवाई से बचने के लिए पैसे मांगे गए, जिस पर शिक्षिका ने 8.5 लाख रुपये ठगों के खाते में जमा कर दिए।

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