कोरबा: फारेस्ट बेरियर बना अवैध वसूली का अड्डा, विरोध करने वालों पर थोपे जा रहे झूठे मुकदमे
प्रशासन की चुप्पी से सवालों के घेरे में सुशासन की गारंटी, स्थानीय पत्रकार से भी की गई अभद्रता
कोरबा (छत्तीसगढ़)। पोड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत फारेस्ट बेरियर में रात्रिकालीन अवैध वसूली का खेल बेखौफ चल रहा है। आरोप है कि रात्रि में वन विभाग के अधिकारी बेरियर से नदारद रहते हैं और उनकी जगह निजी व्यक्तियों को बैठाकर आने-जाने वाले वाहनों से जबरन वसूली की जाती है। जो भी व्यक्ति इस अवैध गतिविधि का विरोध करता है या जानकारी लेना चाहता है, उसके खिलाफ थाना पोड़ी में झूठे और फर्जी मामले दर्ज कर दबाव बनाया जाता है।
राष्ट्रीय जगत विजन ने जब इस मामले में जानकारी लेने हेतु मौके पर पदस्थ एएसआई से संपर्क किया और फोन पर बात की, तो उन्होंने वसूली करने वालों का पक्ष लेते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति ने बेरियर पर गाली-गलौज और धमकी दी, इसलिए उसके खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। जब पत्रकार ने एसपी का नंबर मांगा तो जो नंबर उन्हें दिया गया, वह एएसआई जोगी के नाम पर पंजीकृत था, जिसने खुद को कोरबा एसपी सिद्धार्थ तिवारी बताकर बात की और कहा, अपराध दर्ज हो गया है, अब कोर्ट में जो करना हो करो।
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और वन विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में बेरियर पर खड़े प्राइवेट लोग खुलकर पैसे वसूलते हैं और कोई भी अधिकारी उन पर कार्रवाई नहीं करता। यह सब सरकार की 'जीरो टॉलरेंस फॉर करप्शन' नीति पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है।
सवाल क्या यही है विष्णुदेव साय सरकार का सुशासन? क्या यही है प्रधानमंत्री मोदी की भ्रष्टाचार पर कार्यवाही की गारंटी? अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर क्या संज्ञान लेता है, या फिर जनता को न्याय के लिए केवल अदालत का ही दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।
