वेगस अस्पताल: इलाज में लापरवाही से मरीज की जान गई, जांच रिपोर्ट के बाद संचालक और डॉक्टरों पर एफआईआर

वेगस अस्पताल: इलाज में लापरवाही से मरीज की जान गई, जांच रिपोर्ट के बाद संचालक और डॉक्टरों पर एफआईआर

बिलासपुर। इमलीपारा स्थित निजी वेगस अस्पताल में एक मरीज के इलाज में हुई लापरवाही के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) द्वारा कराई गई जांच में मेडिकल केयर में कमी की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने अस्पताल के संचालक, इलाज करने वाले डॉक्टरों और संबंधित स्टाफ के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।

यह पूरी घटना रामा रेसीडेंसी में रहने वाले 52 वर्षीय शिवकुमार सूत्रकार से संबंधित है। शिवकुमार के दोनों पैरों में घाव की समस्या थी। उनकी पत्नी नीतू ने उन्हें इलाज के लिए 10 दिसंबर 2024 को वेगस अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां करीब 15 दिनों तक उनका इलाज चला, लेकिन मरीज की हालत में सुधार नहीं हुआ और 25 दिसंबर 2024 को अस्पताल में ही उनकी मौत हो गई।

मरीज की मौत के बाद पत्नी नीतू और अन्य परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। परिजनों का कहना था कि अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज और मरीज की हालत को लेकर उन्हें सही जानकारी नहीं दी। इलाज में कोताही बरती गई, जिसके कारण शिवकुमार की जान चली गई। इसके बाद परिजनों ने तोरवा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग से मामले की शिकायत की थी।

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शिकायत मिलने पर सीएमएचओ ने एक जांच समिति का गठन किया। इस समिति ने वेगस अस्पताल पहुंचकर 10 दिसंबर से लेकर 25 दिसंबर तक के मरीज के पूरे मेडिकल रिकॉर्ड की पड़ताल की। ट्रीटमेंट चार्ट और दस्तावेजों की जांच में यह बात सामने आई कि मरीज को जिस स्तर की मेडिकल केयर मिलनी चाहिए थी, उसमें कमी रखी गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में चिकित्सकीय लापरवाही होने की बात स्वीकार की।

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स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद तोरवा थाने में शून्य पर कायमी की गई। चूंकि वेगस अस्पताल सिविल लाइन थाना क्षेत्र के दायरे में आता है, इसलिए केस डायरी वहां भेज दी गई। सिविल लाइन पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1) के तहत अस्पताल के मालिक, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ अपराध दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

शहर के निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की जान जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। कई बार ऐसी शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई सिर्फ नोटिस देने तक सीमित रह जाती है, लेकिन इस मामले में मेडिकल रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिसके बाद पुलिस ने मामले को विवेचना में लिया है।

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