रायपुर में ‘धीमा जहर’ का खेल: 1200 किलो नकली पनीर जब्त, केमिकल से बन रहा था जहर, 4 साल में लिवर सिरोसिस और कैंसर का खतरा

रायपुर में ‘धीमा जहर’ का खेल: 1200 किलो नकली पनीर जब्त, केमिकल से बन रहा था जहर, 4 साल में लिवर सिरोसिस और कैंसर का खतरा

रायपुर: रायपुर में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जहां खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने भाठागांव स्थित एक डेयरी यूनिट पर छापा मारकर करीब 1200 किलो कथित नकली पनीर जब्त किया। जांच के दौरान अधिकारियों को पाम ऑयल, दूध पाउडर, एसिटिक एसिड और अन्य रासायनिक पदार्थ मिले, जिनका उपयोग पनीर बनाने में किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह उत्पाद लंबे समय से बाजार में सप्लाई हो रहा था और आम उपभोक्ता अनजाने में इसे खरीद रहे थे।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसी यूनिट पर कुछ महीने पहले भी बड़ी कार्रवाई हो चुकी थी, जिसमें भारी मात्रा में संदिग्ध पनीर नष्ट किया गया था। इसके बावजूद दोबारा उत्पादन जारी रहना कई सवाल खड़े करता है, क्या निगरानी में चूक हुई या फिर सिस्टम में कहीं न कहीं लापरवाही या मिलीभगत है? इस बार कार्रवाई के लिए बाहरी जिलों की टीम को शामिल किया गया, जिससे मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

इसी दिन शहर के उरला इलाके में एक अन्य डेयरी यूनिट पर भी छापा पड़ा, जहां अस्वच्छ परिस्थितियों में पनीर तैयार किया जा रहा था। अधिकारियों ने वहां से सैंपल लेकर बड़ी मात्रा में उत्पाद नष्ट कराया। यह संकेत देता है कि समस्या किसी एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं, बल्कि शहर में मिलावटी डेयरी उत्पादों का एक व्यापक नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मिलावटी पनीर का सेवन शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। लगातार सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं, बढ़ता कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग का खतरा बढ़ता है। गंभीर मामलों में यह लिवर को नुकसान पहुंचाकर सिरोसिस जैसी स्थिति पैदा कर सकता है, जो सामान्यतः दशकों में विकसित होती है, लेकिन मिलावटी खाद्य पदार्थों से यह प्रक्रिया तेज हो सकती है।

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यह घटना उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी है कि वे खाने-पीने की चीजों को लेकर सतर्क रहें और केवल प्रमाणित स्रोतों से ही डेयरी उत्पाद खरीदें। वहीं प्रशासन के लिए यह एक बड़ा टेस्ट केस है कि वह मिलावटखोरों के खिलाफ कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है। खाद्य सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक अहम मुद्दा है, जिस पर लगातार निगरानी और कड़े कदम जरूरी हैं।

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