हर साल 100 करोड़ खर्च, फिर भी नहरें जर्जर: लगातार शिकायतों के बाद जल संसाधन विभाग की तैयारी, 108 ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट, अब टेंडर प्रक्रिया से होंगे काम

हर साल 100 करोड़ खर्च, फिर भी नहरें जर्जर: लगातार शिकायतों के बाद जल संसाधन विभाग की तैयारी, 108 ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट, अब टेंडर प्रक्रिया से होंगे काम

रायपुर। जल संसाधन विभाग में किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना लगातार गड़बड़ी की भेंट चढ़ रही है। विभाग हर साल करीब 100 करोड़ रुपए सिर्फ 'पीस वर्क' यानी टुकड़ों में काम करवाने के नाम पर खर्च कर रहा है। इसके तहत प्रतिवर्ष 4,000 से 5,000 छोटे-छोटे काम ठेकेदारों को बांटे जाते हैं। लेकिन धरातल पर जाकर देखने से पता चलता है कि अधिकांश नहरें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। वे गाद और झाड़ियों से पटी पड़ी हैं। कार्य की सही निगरानी न होने की वजह से रबी फसल के समय होने वाले 60 प्रतिशत 'इमरजेंसी रिपेयर' कार्य धरातल के बजाय केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं।

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब जल संसाधन विभाग जांच के दायरे में आ गया है। विभागीय ऑडिट और शिकायतों के आधार पर इस पूरे मामले में चार बड़े खुलासे सामने आए हैं।

जांच के दायरे में विभाग: 4 बड़ी गड़बड़ियां

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 फिंगेश्वर-महासमुंद इलाके में 1 करोड़ रुपए के फर्जी आहरण की शिकायत सामने आई है, और मामले से जुड़ी फाइलें ही गायब कर दी गई हैं।गड़बड़ी करने वाले 40 से ज्यादा ठेकेदारों के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है। इसके साथ ही 108 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी विभाग कर रहा है।

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 विभागीय ऑडिट में इस बात की पुष्टि हो गई है कि 40 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्यों को जानबूझकर टुकड़ों में बांटा गया।

सिर्फ कागजी मस्टररोल बनाने और फर्जी लेबर पेमेंट करने की 50 से अधिक शिकायतें विभाग में दर्ज की गई हैं।

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नहरों के काम में कैसे खर्च हो रहा है, यह इन तीन जगहों की स्थिति से समझा जा सकता है:

 बालोद (करहीभदर-मुजगहन नहर)

तांदुला और महानदी को जोड़ने वाली यह नहर बीच से टूट चुकी है। इसे मरम्मत के बजाय केवल मिट्टी-मुरम की बोरियों से टिकाया गया है। हकीकत यह है कि पिछले 5 साल में 6 बार मरम्मत दिखाकर 2 करोड़ से ज्यादा की राशि स्वाहा की गई है।

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 धमतरी (नगरी वितरक नहर - सॉदूर बांध)

 भगतपुर-लालपुर खार में नहर पूरी तरह उखड़ी पड़ी है। यहां काम के नाम पर सिर्फ मुरम भरकर खानापूर्ति की गई है। 5 साल में 4 बार पीस वर्क पर 2 करोड़ खर्च हुए, और अब फिर 2.66 करोड़ रुपए स्वीकृत कर लिए गए हैं।

 

 कवर्धा (सूतियापाट नहर)

यहां पहले 1 से 1.5 करोड़ रुपए का खर्च बताया गया। फिलहाल 10 किमी का नया काम जारी है। हकीकत में पुरानी जर्जर लाइनिंग, गाद और टूटी टाइल्स वैसे ही दबी हैं, जिनके ऊपर सीमेंट की परत चढ़ाई जा रही है जो बारिश में छिप जाएंगी।

टुकड़ों के बजाय अब टेंडर प्रक्रिया की प्लानिंग

इस पूरे मामले में जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो का कहना है कि नहरों के पीस वर्क का काम एनुअल रिपेयरिंग के तहत एचओडी स्तर पर होता है। लगातार टुकड़ों में काम होने के कारण ही काम में गड़बड़ी की शिकायतें आती हैं। आगे काम पारदर्शी तरीके से हो, इसके लिए विभाग अब टेंडर प्रक्रिया अपनाने और सख्त मॉनिटरिंग की प्लानिंग कर रहा है।

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