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SDM कार्यालय में गजब का खेल: सुनवाई से पहले ही आदेश तैयार , चोरी पकड़ी गई तो फाड़ कर फेंका आदेश
बिलासपुर। न्याय की उम्मीद में कोर्ट जाने वाले लोगों को क्या पता कि वहां इंसाफ से पहले बाबू की मर्जी चलती है। बिलासपुर एसडीएम कोर्ट में एक ऐसा ही मामला अनोखा मामला सामने आया है जिसने सिस्टम सिस्टम और एसडीएम साहब के कार्यालय की साख पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
जूना बिलासपुर की एक बेशकीमती जमीन के मामले में फाइल के भीतर चुपके से विरोधी पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए आदेश तैयार कर लिया गया। जब पीड़ित पक्ष के वकील ने इस चमत्कार को देख लिया, तो वहां एसडीएम न्यायालय में पदस्थ बाबू विनय विश्वकर्मा ने आव देखा न ताव, फाइल से आदेश का पन्ना फाड़कर फेंक दिया। मामले की शिकायत पीड़ित ने कलेक्टर और राजस्व मंत्री सीखी है और पूछा है कि क्या ऐसे ही तहसील में कार्य होता है।
सुनवाई हुई नहीं और फैसला तैयार: ये कैसी जादुई अदालत?
मामला खसरा नंबर 885/5 की जमीन से जुड़ी एक अपील का है जो मार्च 2025 से चल रही है। शिकायतकर्ता कीर्ति राव के पास जमीन के सभी पक्के कागज, रजिस्ट्री और पटवारी रिपोर्ट मौजूद है। केस में दूसरा पक्ष मनप्रीत सिंह होरा आज तक एक बार भी पेशी पर नहीं आया। नियम कहता है कि दोनों पक्षों को सुनकर फैसला होगा, लेकिन यहां तो बाबू जी ने बिना सुनवाई के ही खारिज करने का आदेश लिखकर फाइल में दबा दिया था। ऐसा लगता है जैसे एसडीएम कोर्ट में भविष्यवाणियों के आधार पर फैसले पहले ही लिख दिए जाते हैं, बस वकील का देखना बाकी रह गया था।

वकील ने पकड़ी चोरी तो बाबू दिखाने लगे दबंगई
घटना तब हुई जब पीड़ित के अधिवक्ता फाइल चेक करने पहुंचे। फाइल खोलते ही उनके होश उड़ गए क्योंकि आवेदन खारिज करने का आदेश पहले से तैयार था। जैसे ही वकील ने इस बात पर आपत्ति जताई, बाबू विनय विश्वकर्मा ने फिल्मी डान की तरह गुंडागर्दी दिखाना शुरू कर दिया। उसने तुरंत आदेश फाड़ दिया और फाइल छीनकर गाली गलौच पर उतर आया
सूत्र बताते हैं कि बाबू ने ऐसा इसलिए किया ताकि उसकी चोरी ना पकड़ी जाए और पूरे सबूत मिटा दिया जाए।
अधिकारियों तक पहुंची बात: अब क्या होगी कार्रवाई?
इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे की शिकायत अब कलेक्टर और संभाग आयुक्त तक पहुंच गई है। पीड़ित पक्ष ने बाबू को तुरंत निलंबित करने और उस पर केस दर्ज करने की मांग की है। वकीलों के बीच भी इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि अगर बाबू ही जज बनकर आदेश फाड़ने लगेंगे तो जज की कुर्सी का क्या काम। फिलहाल प्रशासन ने जांच की बात कही है, लेकिन चर्चा यही है कि क्या इस 'पन्ना फाड़' बाबू पर वाकई कोई गाज गिरेगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
पीड़ित कीर्ति राव ने बताया कि जब सारे दस्तावेज मेरे पक्ष में हैं, तो बिना सुनवाई के आदेश तैयार करना सीधा प्रशासनिक भ्रष्टाचार है। SDM कार्यालय में मौजूद वकीलों ने बताया कि यदि लीगल दस्तावेजों के साथ इस तरह से गुंडागर्दी होगी, तो आम आदमी को न्याय व्यवस्था पर भरोसा ही नहीं रहेगा।
उठ रही विभागीय जांच की मांग
एसडीएम कार्यालय में हुए इस अजीब घटनाक्रम में पूरी व्यवस्था को हिला कर रख दिया है इस बात की जानकारी मिलने के बाद तहसील कार्यालय पहुंचने वाले लोगों मे काफी गुस्सा देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि मामले की विभागीय जांच होनी चाहिए ताकि मामले की सच्चाई सबके सामने आ सके
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
