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पूर्व मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से राहत, मिली अंतरिम जमानत
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में आरोप में लंबे समय से जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। ED और EOW के मामलों में लखमा को सशर्त रूप से अंतरिम ज़मानत दे दी गई है।
जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कई कंडीशन भी लगाई हैं। इन शर्तों में उन्हें राज्य से बाहर रहना होगा, कोर्ट पेशी पर छत्तीसगढ़ आ सकेंगे, पासपोर्ट जमा करना होगा और पता व मोबाइल नंबर पुलिस थाने में दर्ज कराना होगा।
उल्लेखनीय है कि, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज पिछले शनिवार को ही रायपुर सेंट्रल जेल में कवासी लखमा से मिलने पहुंचे थे। जेल में बैज ने लखमा का हाल-चाल जाना और उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली थी। मुलाकात के बाद बैज ने मीडिया से कहा था कि, हमें पूरा भरोसा है- फरवरी में कोर्ट उन्हें ज़मानत दे देगा। बाहर आने के बाद लखमा बस्तर और पूरे प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करेंगे।
इस मामले में पीसीसी चीफ दीपक बैज ने यह भी कहा था कि, आदिवासी नेता को जानबुझ करके जेल भेजा गया। यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई। इसके खिलाफ पूरे प्रदेश में आवाज़ उठाई जाएगी। जेल में कवासी लखमा का स्वास्थ्य पहले ठीक नहीं था, लेकिन अब उनकी सेहत बेहतर है।
3,200 करोड़ रुपए से अधिक का है शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान हुए शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है। ED ने इस मामले में एसीबी में FIR दर्ज कराई है, जिसमें करीब 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का दावा किया गया है। FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल बताए गए हैं। ED के अनुसार, तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए शराब घोटाले को अंजाम दिया गया है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
