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CG NEWS : मेडिकल PG में भूचाल, हाईकोर्ट ने कहा- नियम बदले तो सीट गई, अब नई काउंसलिंग ही आख़िरी रास्ता....
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों के पोस्ट ग्रेजुएट (PG) पाठ्यक्रमों में दाखिले को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों में बदलाव होने की स्थिति में पुराने अलॉटमेंट स्वतः समाप्त माने जाएंगे और अब अभ्यर्थियों को नई काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए ही सीट हासिल करनी होगी।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि वर्ष 2025 के नियम-11 में संशोधन के बाद किसी भी अभ्यर्थी को पहले से आवंटित PG सीट पर बने रहने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं रह जाता है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इस मुद्दे पर अब कोई नई याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी।
क्या था पूरा मामला
भिलाई निवासी अनुष्का यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राज्य सरकार के 22 और 23 जनवरी 2026 के आदेशों को चुनौती दी थी। इन आदेशों के जरिए पहले से पूरी हो चुकी काउंसलिंग और सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का दावा था कि उसने मेरिट के आधार पर भिलाई के एक निजी मेडिकल कॉलेज में रेडियो डायग्नोसिस विषय की PG सीट हासिल की थी और 10.79 लाख रुपये फीस के साथ 10 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कर कोर्स जॉइन भी कर लिया था।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिका में कहा गया कि एक बार प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे रद्द करना अवैधानिक और मनमानी है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस फैसले से पहले ही दाखिला ले चुके छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है।
शासन का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि काउंसलिंग रद्द करने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के डॉ. तन्वी बहल प्रकरण में दिए गए आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि डोमिसाइल आधारित आरक्षण PG मेडिकल कोर्स में असंवैधानिक है और केवल सीमित स्तर पर संस्थागत प्राथमिकता ही दी जा सकती है। इसी के मद्देनजर नियम-11 में संशोधन कर 50 प्रतिशत सीटें छत्तीसगढ़ से MBBS करने वाले अभ्यर्थियों के लिए और शेष 50 प्रतिशत सीटें ओपन मेरिट के आधार पर भरने का प्रावधान किया गया।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि जब प्रवेश प्रक्रिया न्यायिक जांच और नियमों के अधीन हो, तब प्रोविजनल अलॉटमेंट को अंतिम प्रवेश नहीं माना जा सकता। नियमों में बदलाव के बाद पहले का अलॉटमेंट अपने आप समाप्त माना जाएगा।
अब आगे क्या
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में PG मेडिकल सीटों के लिए नए नियमों के तहत नई काउंसलिंग का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों से अब प्रवेश प्रक्रिया में अंतिमता और अनुशासन सुनिश्चित होगा।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
