CG NEWS: रायपुर हाउसिंग बोर्ड का महाघोटाला , कागजों पर बन गए 104 मकान; 25 करोड़ के इस खेल में आज एक्शन की तैयारी

CG NEWS: रायपुर हाउसिंग बोर्ड का महाघोटाला , कागजों पर बन गए 104 मकान; 25 करोड़ के इस खेल में आज एक्शन की तैयारी

रायपुर। गरीबों को सस्ते दर पर आशियाना देने वाली छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CGHB) की योजना में एक ऐसा सनसनीखेज घोटाला सामने आया है, जिसने राजधानी के प्रशासनिक हलके में हड़कंप मचा दिया है। बीते कल सामने आए इस बड़े खुलासे के बाद आज हाउसिंग बोर्ड के दफ्तरों में हलचल तेज है और पुरानी फाइलों को खंगालने का दौर शुरू हो गया है।

मामला रायपुर के सेजबहार स्थित दीनदयाल आवास योजना का है। जहां 1435 मकानों की कॉलोनी के लेआउट में से 104 मकान जमीन से पूरी तरह गायब हैं। यानी ये घर कागजों पर तो बने और उनका काम 'पूर्ण' भी दिखा दिया गया, लेकिन हकीकत में इनका कोई वजूद ही नहीं है। कल मीडिया (दैनिक भास्कर) की सुर्खियों में यह मामला आने के बाद आज इस पर विभागीय जांच और बड़ी कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

घोटाले के मुख्य बिंदु एक नजर में:

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  •  प्रोजेक्ट: दीनदयाल आवास योजना सेजबहार (शुरुआत 2006-07)
  •  आवंटन: वर्ष 2009 से हितग्राहियों को पजेशन मिलना शुरू।
  •  गड़बड़ी: 1435 में से 104 मकान केवल रिकॉर्ड में हैं, मौके से पूरी तरह गायब।
  •  घोटाले का आकार: 2006 में इन गायब मकानों की लागत 3-5 करोड़ थी, आज इनकी कीमत 20 से 25 करोड़ रुपए आंकी जा रही है।

हवा में बन गए घर, अफसरों ने बांट लिए करोड़ों?

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सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन 104 घरों की निर्माण राशि बिना एक भी ईंट रखे ही निकाल ली गई? कॉलोनी की नंबरिंग चेक करने पर पूरा झोल शीशे की तरह साफ हो जाता है। मकान नंबर 1288 के बाद की पूरी सीरीज ही गायब और संदिग्ध है। 1288 से 1297, 1298 से 1309, 1310 से 1321, 1322 से 1333 और 1334 से 1345 तक के मकान कॉलोनी में कहीं बने ही नहीं हैं। सालों से यह गड़बड़ी चल रही थी, अफसर फाइलों में 'सब ठीक' लिखते रहे, लेकिन किसी ने ग्राउंड जीरो पर जाकर सच्चाई जानने की जहमत नहीं उठाई।

अफसर की दबंगई: दो घरों को मिलाकर बना लिया एक

ग्राउंड विजिट में सिर्फ गायब मकानों का ही राज नहीं खुला, बल्कि अफसरों की मनमानी का एक और चौंकाने वाला नमूना दिखा। कॉलोनी निर्माण के दौरान ही एक रसूखदार अफसर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए दो अलग-अलग मकानों (यूनिट्स) को एक में मिला लिया और उनका एक ही मुख्य दरवाजा बना दिया। मूल नक्शे में ऐसा कोई डिजाइन नहीं था, लेकिन विभाग आंखें मूंदे बैठा रहा।

आयुक्त का रुख: दस्तावेजों की होगी जांच

इस महाघोटाले के सार्वजनिक होने के बाद छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त अवनीश शरण ने स्पष्ट किया है कि मामले की तहकीकात की जाएगी। उनका कहना है कि "कॉलोनी के स्वीकृत लेआउट से कम मकान बनाए जाने के पीछे की वजह क्या है, इसे चेक करना पड़ेगा। दस्तावेजों और लेआउट का मिलान करने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।"

आज क्या हो सकता है?

सूत्रों के मुताबिक, कल हुए इस बड़े खुलासे के बाद आज विभाग में उच्च स्तरीय हलचल है। 20 से 25 करोड़ रुपये के इस प्रॉपर्टी घोटाले में एक जांच कमेटी गठित होने की प्रबल संभावना है। अब देखना यह है कि कागजों में घर बनाकर करोड़ों डकारने वाले उन तत्कालीन इंजीनियरों और अधिकारियों पर गाज कब गिरती है, जिन्होंने गरीबों के आशियाने की योजना को अपनी कमाई का जरिया बना लिया।

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