शराब, सिंडिकेट और 'सिस्टम' का सरेंडर: 'वेलकम डिस्टलरी' का जहरीला खेल, फ्री की दारू और कमीशन के कॉकटेल से मूक हुए ग्रामीण-नेता, जंगल में बिछ रही जानवरों की लाशें

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बिलासपुर। जब सिस्टम को 'कमीशन' और ग्रामीणों को 'फ्री की शराब' की लत लग जाए, तो वहां से उठने वाला जहरीला धुआं और मरते जानवरों की चीखें किसी को सुनाई नहीं देतीं। कोटा विधानसभा के छेरकाबांधा में स्थित 'वेलकम डिस्टलरी' इन दिनों कुछ ऐसे ही खौफनाक और भ्रष्ट नेक्सस का जीता-जागता सुबूत बन चुकी है। यहां शराब फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला स्पेंट वाश (गंदा पानी) और आसमान को काला करता धुआं पूरे इलाके के पर्यावरण को निगल रहा है। लेकिन, मजाल है कि कोई इसके खिलाफ आवाज उठाए; क्योंकि इस डिस्टलरी ने अपनी तिजोरी के दम पर नेताओं से लेकर आबकारी अफसरों तक की जुबान पर ताला जड़ दिया है।

फ्री दारू और पांच नेताओं का फिक्स कमीशन

फैक्ट्री से सटे पीपरापारा गांव का नजारा किसी 'साइलेंट जोन' से कम नहीं है। गांव के स्कूल पर ताला लटका रहता है और हवा में डिस्टलरी की सड़ांध तैरती रहती है। जब मीडिया ने इस चुप्पी की वजह टटोली, तो ग्रामीण खिलावन , राम लाल, सनद कुमार ने जो सच उगला, वह सिस्टम के मुंह पर तमाचा है। गांव वालों का विरोध इसलिए शांत है क्योंकि फैक्ट्री उन्हें रोजगार के साथ-साथ शाम को मुफ्त की शराब परोसती है। बदबू अब उनकी आदत बन चुकी है। पर्दे के पीछे का असली खेल यह है कि इलाके के पांच रसूखदार नेताओं का फैक्ट्री मालिक ने 'मंथली कमीशन' फिक्स कर रखा है। इन नेताओं को बकायदा यह 'सुपारी' दी गई है कि इलाके में फैक्ट्री के खिलाफ एक भी स्वर न गूंजने पाए।

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मौत का तालाब: जंगल बन रहा श्मशान

 

फैक्ट्री का असल खौफनाक चेहरा जंगल के भीतर छिपा है। ई-रिक्शा चालक आकाश के जरिए जब पगडंडियों से होते हुए जंगल का रुख किया गया, तो वहां तबाही का मंजर नजर आया। फैक्ट्री से निकलने वाले जहरीले और बदबूदार गंदे पानी ने जंगल के बीच एक बड़े 'मौत के तालाब' का रूप ले लिया है। इस जहरीले स्पेंट वाश को पीकर न केवल बेजुबान जानवर दम तोड़ रहे हैं, बल्कि जहां-जहां से यह पानी गुजरता है, वहां के हरे-भरे पेड़-पौधे झुलस कर खाक हो रहे हैं। बरसात और सर्दियों में यह जहर नालों के रूप में पूरे इलाके में फैलकर तबाही मचाता है।

 

आबकारी विभाग की आंखों पर गांधारी की पट्टी

 

नियमों के मुताबिक, हर डिस्टलरी में आबकारी विभाग का एक राजपत्रित अधिकारी तैनात होता है, जिसकी जिम्मेदारी मानकों की निगरानी करना है। लेकिन वेलकम डिस्टलरी में बैठे इन अफसरों ने आंखों पर पट्टी बांध रखी है। चिमनियों से निकलता काला धुआं और जंगल में बहता जहर इन्हें नजर नहीं आता। इसी विभागीय मिलीभगत का नतीजा था कि शराब घोटाले के दौरान इसी डिस्टलरी से दो नंबर की शराब ट्रकों में भरकर खुलेआम निकली। हाल ही में यहां से 8 संदिग्ध ट्रक जब्त भी किए गए हैं, जो बताते हैं कि भीतर का खेल कितना बड़ा है।

 

घोटालों का 'मास्टरमाइंड' है डिस्टलरी का मालिक

 

इस पूरे जहरीले और अवैध साम्राज्य के तार डिस्टलरी के मालिक राजेंद्र जायसवाल से जुड़े हैं, जिनका विवादों और घोटालों से गहरा नाता है:

 

झारखंड में गिरफ्तारी: नवंबर 2025 में झारखंड ACB की टीम ने राजेंद्र जायसवाल को गिरफ्तार किया था। उन पर प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए फर्जी बैंक गारंटी लगाकर 38.44 करोड़ रुपए के शराब घोटाले को अंजाम देने का गंभीर आरोप है, जिसमें वेलकम डिस्टलरी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी (ED) ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में भी इन्हें आरोपी बनाया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने सिंडिकेट को धड़ल्ले से अवैध शराब बेची और करोड़ों रुपए का कमीशन खाया।

 जमानत पर बाहर, फिर से खेल चालू:

फिलहाल जायसवाल जमानत पर बाहर हैं, लेकिन छेरकाबांधा का यह नजारा बताता है कि 'सिस्टम' आज भी उनके इशारों पर ही नाच रहा है।

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