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भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे साहब और सुशासन की राह में रोड़ा बनती सीधी भर्ती वाली ये नई पौध
रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक गलियों में इन दिनों सीधी भर्ती वाले बड़े अफसरों की खूब चर्चा है। राज्य में सुशासन का सपना दिखाने वाली सरकार के लिए अब यही अधिकारी सबसे बड़ा सिरदर्द बन गए हैं। पिछले पांच सालों के काले चिट्ठे खोलें तो कोयला घोटाला, महादेव सट्टा और डीएमएफ जैसे बड़े भ्रष्टाचार के खेल में इन्हीं पढ़े-लिखे सीधी भर्ती वाले अफसरों के नाम सबसे ऊपर आए हैं। हालात ये हैं कि इन अफसरों ने अपने राजनेताओं को भी मलाई का ऐसा लालच दिखाया कि आज कई नेता जेल की हवा खा रहे हैं, जबकि मास्टरमाइंड बने ये अफसर अब भी रसूखदारों की शरण लेकर खुद को बचाने की जुगत में लगे हैं।
सिंडिकेट चलाकर दांव पर लगाई अपनी वर्दी और रसूख
छत्तीसगढ़ में पिछले पांच सालों के भीतर भ्रष्टाचार की जो नई इबारत लिखी गई, उसमें आईएएस और आईपीएस अफसरों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। एडवोकेट नरेश चंद्र गुप्ता ने तो प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीधे तौर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन पर आरोप जड़ा है कि उनके ही कार्यकाल में भ्रष्टाचार का यह पूरा सिंडिकेट फला-फूला। भ्रष्टाचार का आलम यह था कि अफसरों ने अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के चक्कर में पूरा सरकारी तंत्र ही गिरवी रख दिया था। एक सीनियर आईपीएस तो अपने 'बिग बॉस' के घर में ही ताक-झांक करने लगे, जिसका अंजाम उन्हें जेल जाकर भुगतना पड़ा। वहीं, कुछ साल पहले एक आईपीएस की आत्महत्या ने भी इस सिस्टम के भीतर की प्रताड़ना और कड़वे सच को उजागर किया था।
अनुभवी राज्य सेवा के अफसर ही बने संकटमोचन
जब-जब राज्य में कानून व्यवस्था बिगड़ी या कोई बड़ा संकट आया, तब-तब राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रमोट होकर आए अनुभवी अधिकारियों ने ही मोर्चा संभाला। बिलासपुर के एसपी रहे स्व. बी एस मरावी जैसे अधिकारियों को आज भी लोग उनके बेहतरीन काम के लिए याद करते हैं। रायपुर, दुर्ग और बलौदाबाजार जैसे संवेदनशील जिलों में भी देखा गया है कि स्टेट सर्विस के पुलिस अधिकारियों ने अपने लंबे अनुभव के दम पर सरकार की लाज बचाई। इसके विपरीत, पिछले कुछ सालों में सीधी भर्ती के आईएएस और आईपीएस अफसरों की जोड़ी ने जो गड़बड़झाला किया, उसका असर आज भी कई जिलों और विभागों में देखने को मिल रहा है।
सरकार ने कसना शुरू किया शिकंजा और अब बारी है कड़े एक्शन की
अब सरकार ने ऐसे दागी अफसरों पर नकेल कसनी शुरू कर दी है। हाल ही में हुए तबादलों में इस कड़ाई का असर साफ नजर आया है। हालांकि, चर्चा इस बात की भी है कि जब तक घोटालों में शामिल इन बड़े नामों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल नहीं बढ़ेगा। अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने भी साफ किया है कि अमिताभ जैन जैसे अफसरों के कार्यकाल में 2000 करोड़ का शराब घोटाला और कोयला लेवी जैसे कांड हुए, जिनमें प्रशासनिक अफसरों की सीधी संलिप्तता रही है। अगर इन पर अब लगाम नहीं लगी, तो सुशासन सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
