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दुर्ग नगर निगम कमिश्नर पर गंभीर आरोप, परेशान कर्मचारी पहुंचा हाईकोर्ट, कहा- ‘रोज घर का राशन और मूवी टिकट मंगवाते थे साहब’
दुर्ग: दुर्ग नगर निगम से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला अब हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है, जहां निगम कमिश्नर पर अपने ही कर्मचारी से निजी काम करवाने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। एक कर्मचारी ने दावा किया है कि कमिश्नर रोजाना घर का राशन, फल, मूवी टिकट और अन्य निजी सामान मंगवाते थे और मांग पूरी न होने पर उसे नौकरी से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
मामला सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इस पर सुनवाई हुई, जहां जस्टिस पीपी साहू ने कर्मचारी के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह मामला अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
कर्मचारी ने लगाए चौंकाने वाले आरोप
दुर्ग नगर निगम में असिस्टेंट ग्रेड-3 भूपेंद्र गोइर ने अपने अधिवक्ता संदीप दुबे और मानस वाजपेयी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका के साथ कर्मचारी ने व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी कोर्ट में प्रस्तुत किए हैं।
इन व्हाट्सएप चैट्स में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम कमिश्नर सुमित अग्रवाल ने अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए कर्मचारी से बार-बार निजी जरूरतों की पूर्ति करवाई। संदेशों में लाल अंगूर, सेब और संतरा जैसे फल मंगाने से लेकर 10 किलो जवा फूल चावल, फिल्म धुरंधर की कार्नर सीट की दो टिकट, गैस सिलेंडर और यहां तक कि बंगले के लिए एसी जैसी मांगों का उल्लेख है। याचिकाकर्ता का दावा है कि ये फरमाइशें लगातार की जाती रहीं और इन्हें पूरा न करने की स्थिति में उस पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाया गया, जो अब न्यायिक जांच के दायरे में आ चुका है।
बंगले के वाई-फाई का रिचार्ज
इसके अलावा कर्मचारी से एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) की बैठक स्थगित करने और अन्य कर्मचारियों को “समझाने” या “हटा देने” जैसी बातें भी चैट में लिखी होने का दावा किया गया है।
निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई पर सवाल
याचिकाकर्ता कर्मचारी ने बताया कि उसकी नियुक्ति 2014 में चपरासी के पद पर हुई थी और 2019 में प्रमोशन देकर सहायक ग्रेड-3 बनाया गया। 31 जुलाई 2025 को निगम कमिश्नर ने कुछ नियुक्तियों में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए नोटिस जारी किया। आरोपों में प्यून, सहायक राजस्व निरीक्षक और सहायक लेखा अधिकारी की नियुक्ति व पदोन्नति को अवैध बताया गया।
कर्मचारी द्वारा सभी आरोपों पर स्पष्ट और लिखित जवाब देने के बावजूद, विभाग ने उसके खिलाफ सख्त रुख अपनाया। 7 अगस्त 2025 को उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, वहीं 6 अक्टूबर 2025 को पेश की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। लगातार दबाव, मानसिक प्रताड़ना और नौकरी जाने के खतरे से परेशान होकर कर्मचारी ने आखिरकार हाईकोर्ट की शरण ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने हस्तक्षेप करते हुए कर्मचारी के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई, जिससे उसे फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिली है।
हाईकोर्ट की सख्ती
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कर्मचारी के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा दी है। अब इस पूरे प्रकरण में आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
