नेपाल सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: भारत-नेपाल सीमा पर 100 से ज्यादा सामान पर भंसार वसूली पर रोक, सीमावर्ती लोगों को राहत
नई दिल्ली: Nepal के सुप्रीम कोर्ट ने भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले लोगों को बड़ी राहत देते हुए दैनिक उपयोग के सामान पर लगाए गए अतिरिक्त कस्टम शुल्क की वसूली पर अस्थायी रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय आने तक सीमा पार से लाए जाने वाले रोजमर्रा के सामान पर 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य होने पर भी भंसार (कस्टम शुल्क) नहीं लिया जाएगा। इस फैसले के बाद तराई-मधेश और सीमावर्ती इलाकों में खुशी का माहौल देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की संयुक्त पीठ ने प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और संबंधित सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया कि आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों से जुड़े सामान पर तत्काल प्रभाव से शुल्क वसूली बंद की जाए। दरअसल, नेपाल सरकार ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी कर भारत सीमा से आने वाले सामान पर नई कस्टम व्यवस्था लागू की थी, जिसके तहत 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर शुल्क देना अनिवार्य कर दिया गया था। इस फैसले के बाद सीमा क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन और नाराजगी बढ़ने लगी थी।
इस नीति को चुनौती देते हुए अधिवक्ताओं के एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क रखा कि नई व्यवस्था सीमा शुल्क कानून की मूल भावना के खिलाफ है और इससे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में इन दलीलों को गंभीर मानते हुए सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। अब अंतिम फैसला आने तक पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।
इस फैसले को भारत-नेपाल के पारंपरिक “बेटी-रोटी” संबंधों और सीमावर्ती सामाजिक-आर्थिक जुड़ाव के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। वर्षों से दोनों देशों के सीमावर्ती लोग बिना बड़ी बाधाओं के व्यापार और दैनिक जरूरतों की पूर्ति करते रहे हैं। अदालत के इस आदेश के बाद सीमा क्षेत्रों में राहत की भावना है और लोग इसे आम नागरिकों के हित में आया संतुलित और मानवीय निर्णय बता रहे हैं।
