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स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: गरियाबंद में ऑक्सीजन खत्म होने से एंबुलेंस में मरीज की मौत
गरियाबंद: गरियाबंद में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक घटना सामने आई है, जहां ऑक्सीजन की कमी के चलते एंबुलेंस में ही एक युवक की मौत हो गई। इस मामले के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण हालात बन गए और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।
जानकारी के मुताबिक, गरियाबंद निवासी 35 वर्षीय बसंत देवांगन को शनिवार रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर सोमेश्वर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब 12 घंटे बाद डॉक्टरों ने उसे निमोनिया से पीड़ित बताया और हालत गंभीर होने की बात कही। परिजनों का कहना है कि मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती रही, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उसे बड़े अस्पताल रेफर करने में टालमटोल की।
रविवार दोपहर परिजन मरीज को रायपुर ले जाने पर अड़े रहे। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने पहले एंबुलेंस उपलब्ध कराने में देरी की और ड्राइवर न होने का हवाला दिया। मजबूरी में मरीज का भाई खुद एंबुलेंस चलाने को तैयार हुआ। जब एंबुलेंस मिली, तब न तो उसमें कोई पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद था और न ही ऑक्सीजन की समुचित व्यवस्था की गई थी।
परिजन जैसे ही मरीज को लेकर निकले, गरियाबंद से करीब पांच किलोमीटर आगे उसकी हालत और बिगड़ गई। पांडुका के पास एक निजी अस्पताल में दिखाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं परिजनों को यह भी बताया गया कि एंबुलेंस में लगा ऑक्सीजन सिलेंडर पूरी तरह खाली था, जिससे मरीज को रास्ते में ऑक्सीजन नहीं मिल सकी।
मौत के बाद गुस्साए परिजन शव को वापस सोमेश्वर अस्पताल लेकर पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इस दौरान इलाज कर रही लेडी डॉक्टर और परिजनों के बीच तीखी बहस हो गई। आरोप है कि डॉक्टर ने नाराजगी जताते हुए परिजनों से सख्त लहजे में बात की और उन्हें अनुशासन में रहने की चेतावनी दी, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब परिजनों ने शव को उसी एंबुलेंस से घर ले जाने की मांग की। अस्पताल प्रबंधन ने ऐसा करने से इनकार करते हुए 108 एंबुलेंस बुलाने की सलाह दी। इससे आक्रोशित परिजनों ने एंबुलेंस को सड़क पर खड़ा कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
स्थिति बिगड़ती देख सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश देकर हालात को नियंत्रित किया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद परिजन शांत हुए और शव को एंबुलेंस से ले जाया गया। फिलहाल परिजन अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
