22 छात्र-छात्राओं को एडमिट कार्ड नहीं मिलने पर परीक्षा से वंचित होने का खतरा

unnamed राष्ट्रीय जगत विजन। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले स्थित पीएम श्री स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय के कक्षा 10वीं और 12वीं के 22 छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा में शामिल होने को लेकर असमंजस में हैं। कारण यह है कि उनकी उपस्थिति बोर्ड द्वारा निर्धारित न्यूनतम 75 प्रतिशत से कम पाई गई है।

 

         विद्यालय के प्राचार्य ने उपस्थिति मानकों का हवाला देते हुए अब तक परीक्षा की अनुमति (क्लीयरेंस) देने से इनकार कर दिया है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) का कहना है कि वे अंतिम निर्णय लेने से पहले प्राचार्य से लिखित जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं। वहीं 6 फरवरी को प्रभावित छात्रों ने सांरगढ़ जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने प्राचार्य को हटाने और तुरंत एडमिट कार्ड जारी करने की मांग की। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे भूख हड़ताल पर बैठेंगे। जिला अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि मामले की जांच नियमों के अनुसार की जाएगी।आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि छात्रों की उपस्थिति निर्धारित सीमा से कम है। वहीं प्राचार्य का कहना है कि बोर्ड नियमों का उल्लंघन कर क्लीयरेंस जारी नहीं की जा सकती। दूसरी ओर छात्रों का आरोप है कि इस स्तर पर परीक्षा से रोकना उनके पूरे शैक्षणिक वर्ष को बर्बाद कर देगा।

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जिलाधिकारी ने किया छग शिक्षा मंडल से अनुरोध

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इस बीच, 15 जनवरी 2026 को सांरगढ़-बिलाईगढ़ के जिला शिक्षा अधिकारी ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से अनुरोध किया था कि वह अपना ऑनलाइन पोर्टल अनलॉक करे, ताकि स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय के 22 छात्र-छात्राएं प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) परीक्षा में शामिल हो सकें। विद्यालय प्रशासन ने इससे पहले इन छात्रों को अपर्याप्त उपस्थिति के कारण 2025-26 की वार्षिक प्रायोगिक और प्रोजेक्ट परीक्षाओं से वंचित कर दिया था। इसके बाद छात्रों ने कलेक्टर और डीईओ को आवेदन देकर परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी।जांच के लिए गठित एक टीम ने विद्यालय का दौरा किया और प्राचार्य, कक्षा शिक्षकों व छात्रों के बयान दर्ज किए। प्राचार्य ने दोहराया कि कार्रवाई बोर्ड के नियमों के अनुरूप की गई है। जांच के दौरान यह भी सिफारिश की गई कि छात्रों को अतिरिक्त कक्षाओं के माध्यम से उपस्थिति पूरी करने का अवसर दिया जाए। चूंकि वार्षिक सैद्धांतिक परीक्षाएं 20 फरवरी 2026 से शुरू होनी हैं, इसलिए डीईओ ने प्राचार्य को विशेष प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित करने के निर्देश दिए हैं और यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि पोर्टल दोबारा खुलने पर छात्रों के अंक दर्ज किए जाएं।

अविभावकों ने प्रशासन से की मानवीय सहानभूति अपनाने की अपील

डीईओ ने रविवार को बताया कि मामला अभी विचाराधीन है। उन्होंने कहा,हम उपस्थिति रिकॉर्ड और कमी के कारणों को लेकर प्राचार्य से विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जवाब मिलने के बाद नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। नियमों के मुताबिक, विद्यालय प्रशासन को अब सभी छूटे हुए विषयों की पुन: परीक्षा आयोजित करनी होगी और छात्रों को कम से कम 24 घंटे पहले इसकी सूचना देनी होगी। यदि विद्यालय का मार्क्स एंट्री पोर्टल पहले से लॉक है, तो प्राचार्य को डीईओ कार्यालय से औपचारिक अनुशंसा लेकर बोर्ड से पोर्टल अनलॉक कराने का अनुरोध करना होगा। इसके साथ ही छात्रों की 75 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी चलानी होंगी। इस बीच, अभिभावकों ने प्रशासन से मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि शिक्षा के अंतिम चरण में छात्रों को परीक्षा से वंचित करना उनके भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

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