महिला बाल विकास मंत्री के दफ्तर से विशेष सहायक की विदाई को बीते पांच दिन अब नए चेहरे की तलाश और डैमेज कंट्रोल पर फोकस

महिला बाल विकास मंत्री के दफ्तर से विशेष सहायक की विदाई को बीते पांच दिन अब नए चेहरे की तलाश और डैमेज कंट्रोल पर फोकस

रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के कार्यालय में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल को आज पांच दिन से अधिक का समय बीत चुका है। बीते 22 मई को विवादों में घिरीं विशेष सहायक रूही टेम्भुरकर को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया था। साड़ी घोटाले और कार्यकर्ताओं की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद हुई इस बहुचर्चित कार्रवाई के बाद अब विभागीय गलियारों में नए सिरे से व्यवस्था बनाने की कवायद काफी तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फौरी कदम से सरकार ने डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया है लेकिन असली चुनौती अब शुरू हुई है।

कार्यकर्ताओं की आवाजाही हुई सुलभ पर नए चेहरे का इंतजार

रूही टेम्भुरकर की विदाई के बाद से ही मंत्री कार्यालय का पूरा माहौल बदला हुआ नजर आ रहा है। जिन जमीनी कार्यकर्ताओं और भाजपा नेताओं को पहले अपनी ही मंत्री तक पहुंचने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती थी अब उनकी आवाजाही काफी सहज हो गई है। संगठन के भीतर पनप रहा वह भारी असंतोष फिलहाल शांत होता दिख रहा है जो एक खास तरह की दरबार संस्कृति के कारण उपजा था। हालांकि अब सत्ता के गलियारों में सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मंत्री की कोर टीम में अहम पद पर अब किसकी नियुक्ति होगी जिसे  लेकर कई नामों पर विचार चल रहा है।

साड़ी गड़बड़ी की आंच अभी पूरी तरह शांत नहीं

विशेष सहायक को हटाए जाने के बावजूद बहुचर्चित साड़ी वितरण गड़बड़ी का मुद्दा पूरी तरह से ठंडा नहीं पड़ा है। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आज भी गर्म है कि क्या सिर्फ एक अधिकारी को कार्यमुक्त कर देने भर से पूरे विभागीय कुप्रबंधन की जिम्मेदारी तय हो गई। विपक्ष लगातार इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और आगामी दिनों में सरकार से इस गड़बड़ी की विस्तृत जांच रिपोर्ट की मांग कर सकता है। सत्ता पक्ष के लिए यह कार्रवाई एक तात्कालिक राहत तो साबित हुई है लेकिन जनता के बीच साफ सुथरी छवि पेश करने के लिए मंत्री को विभाग की कार्यप्रणाली में भारी पारदर्शिता लानी होगी।

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सूरजपुर विवाद से सबक लेकर हो रही नई तैयारी

सामान्य प्रशासन विभाग के कार्यमुक्ति आदेश के बाद रूही टेम्भुरकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में अपनी उपायुक्त की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। दूसरी ओर महिला एवं बाल विकास विभाग में नए स्टाफ की नियुक्ति को लेकर लगातार मंथन जारी है। माना जा रहा है कि इस बार मंत्री कार्यालय में किसी भी नियुक्ति से पहले संगठन के आला नेताओं से गहन विचार विमर्श किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि भविष्य में सूरजपुर कनेक्शन जैसी कोई भी अंदरूनी राजनीतिक खींचतान दोबारा न हो जिसके चलते पिछली बार विवाद बढ़ा था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपने कार्यालय के सुचारू संचालन के लिए क्या कड़े नियम तय करती हैं।

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