CG Education: 70 बनाम 80 GSM विवाद में फंसीं किताबें, नया सत्र शुरू लेकिन लाखों छात्र अब भी पाठ्य पुस्तकों के इंतजार में

CG Education: 70 बनाम 80 GSM विवाद में फंसीं किताबें, नया सत्र शुरू लेकिन लाखों छात्र अब भी पाठ्य पुस्तकों के इंतजार में

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत तो हो चुकी है, लेकिन लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई अब भी अधूरी मानी जा रही है। वजह है, पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति में हुई देरी। इस बार देरी का सबसे बड़ा कारण 70 बनाम 80 GSM कागज को लेकर उठा विवाद माना जा रहा है। कागज की गुणवत्ता को लेकर पाठ्य पुस्तक निगम में तकनीकी मतभेद, टेंडर प्रक्रिया में बदलाव, खरीद संबंधी निर्णयों में विलंब और प्रशासनिक स्तर पर हुई देरी का असर सीधे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर दिखाई दे रहा है। स्थिति यह है कि कई सरकारी स्कूलों में शिक्षक बिना किताबों के पढ़ाई कराने को मजबूर हैं, जबकि विद्यार्थियों को नोट्स या पुरानी पुस्तकों के सहारे शुरुआती कक्षाएं करनी पड़ रही हैं। शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही किताबें उपलब्ध नहीं होने से अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भी चिंता बढ़ गई है।

50 लाख से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर
प्रदेश में हर वर्ष 50 लाख से अधिक विद्यार्थियों को राज्य सरकार की ओर से निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। ये किताबें पहली से बारहवीं तक के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में वितरित की जाती हैं। समय पर किताबें उपलब्ध कराना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि अधिकांश विद्यार्थियों के लिए यही अध्ययन का प्रमुख माध्यम होती हैं। पिछले वर्ष लगभग 2.5 करोड़ पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन किया गया था, जिस पर 80 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आया था। इसके लिए करीब 9 हजार मीट्रिक टन कागज खरीदा गया था। इस वर्ष पाठ्य पुस्तकों की संख्या और विषयों में वृद्धि होने के कारण लगभग 11 हजार मीट्रिक टन कागज खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे पाठ्य पुस्तक निगम पर करीब 16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है।

70 बनाम 80 GSM कागज का विवाद बना देरी की वजह
सूत्रों के अनुसार इस वर्ष कागज की गुणवत्ता को लेकर 70 GSM और 80 GSM पेपर के उपयोग पर लंबे समय तक तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा चलती रही। इसी विवाद के चलते टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हुई और कागज की खरीद समय पर पूरी नहीं हो सकी। इसका सीधा असर मुद्रण कार्य पर पड़ा और पुस्तकों की छपाई तथा वितरण निर्धारित समयसीमा से पीछे खिसक गया। यही कारण है कि नया सत्र शुरू होने के बावजूद कई जिलों में विद्यार्थियों तक किताबें नहीं पहुंच सकीं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति में शुरुआती देरी का असर पूरे शैक्षणिक कैलेंडर पर पड़ सकता है, विशेषकर प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों पर।

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22 जून तक वितरण का था दावा, अब एक सप्ताह और इंतजार
शाला प्रवेशोत्सव से पहले पाठ्य पुस्तक निगम ने दावा किया था कि 22 जून तक प्रदेश के सभी स्कूलों में किताबें पहुंचा दी जाएंगी। हालांकि वास्तविक स्थिति इससे अलग नजर आ रही है। निगम का कहना है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की लगभग 80 प्रतिशत पुस्तकें ही संकुल स्तर तक पहुंच पाई हैं। शेष पुस्तकों की आपूर्ति लगातार जारी है और अगले एक सप्ताह के भीतर सभी संकुलों तक वितरण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि कई जिलों से ऐसी जानकारी भी सामने आ रही है कि हाई स्कूल स्तर की कुछ विषयवार पुस्तकें अभी भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को शुरुआती पाठ्यक्रम पूरा कराने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

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इस बार बढ़े विषय, बढ़ा प्रकाशन का दायरा
शैक्षणिक सत्र 2026-27 में राज्य सरकार ने पाठ्यक्रम में भी कुछ बदलाव किए हैं। पिछले वर्ष पहली से आठवीं तक 134 विषयों की पुस्तकें प्रकाशित की गई थीं, जबकि इस बार 138 विषयों की पुस्तकें तैयार की गई हैं।

एससीईआरटी के अनुसार

  • कक्षा चौथी में योग और कला विषय जोड़े गए हैं।
  • कक्षा सातवीं में कला तथा व्यावसायिक शिक्षा को शामिल किया गया है।
  • इसके अलावा प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर सहायक वाचन विषय भी पहली बार लागू किया गया है।

नए विषय जुड़ने से पुस्तकों की संख्या और मुद्रण कार्य दोनों में वृद्धि हुई, जिससे इस बार प्रकाशन और वितरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो गई।

छह बड़े डिपो से पूरे प्रदेश में होती है आपूर्ति
प्रदेशभर में पुस्तकों के वितरण के लिए पाठ्य पुस्तक निगम के छह प्रमुख डिपो संचालित किए जाते हैं। इनमें रायपुर के भनपुरी स्थित सेंट्रल वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन और उरकुरा औद्योगिक क्षेत्र प्रमुख केंद्र हैं, जहां से रायपुर, धमतरी, दुर्ग, कांकेर, गरियाबंद, बलौदाबाजार, महासमुंद और बेमेतरा जिलों में किताबें भेजी जाती हैं। इसके अलावा बिलासपुर, रायगढ़, राजनांदगांव, जगदलपुर और अंबिकापुर स्थित डिपो से भी संबंधित संभागों और जिलों में पुस्तकों की आपूर्ति की जाती है।

निजी स्कूलों में भी शुरू होगा वितरण
पाठ्य पुस्तक निगम के अनुसार आज से रायपुर जिले के निजी स्कूलों को भी ब्लॉकवार व्यवस्था के तहत पुस्तकों का वितरण शुरू किया जा रहा है। हालांकि सरकारी स्कूलों के सभी संकुलों तक अभी भी पूरी आपूर्ति नहीं हो सकी है। रायपुर जिले के धरसींवा ब्लॉक में पुस्तकों का वितरण किया जा चुका है, जबकि अन्य क्षेत्रों में आपूर्ति जारी है।

जल्द पूरी होगी आपूर्ति : निगम
पाठ्य पुस्तक निगम के अधिकारियों का कहना है कि पुस्तकें लगातार विभिन्न जिलों और संकुलों तक भेजी जा रही हैं। निगम का दावा है कि शेष बची पुस्तकों की आपूर्ति भी जल्द पूरी कर दी जाएगी, ताकि सभी विद्यार्थियों को नए सत्र की पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए आवश्यक अध्ययन सामग्री समय पर उपलब्ध हो सके। हालांकि सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि वितरण की पूरी तैयारी पहले से थी, तो नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही विद्यार्थियों के हाथों में किताबें क्यों नहीं पहुंच सकीं। 

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