सांसों में घुल रही धूल: रतनपुर-पेंड्रा हाईवे पर उड़ते गुबार ने बंद की राह, लोगों का घर से निकलना हुआ दूभर

सांसों में घुल रही धूल: रतनपुर-पेंड्रा हाईवे पर उड़ते गुबार ने बंद की राह, लोगों का घर से निकलना हुआ दूभर

बिलासपुर। रतनपुर से पेंड्रा के बीच बन रहे नेशनल हाईवे 45 पर इन दिनों चलना मौत को दावत देने जैसा हो गया है। सड़क निर्माण के दौरान उड़ रही भारी धूल ने राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। आलम यह है कि सड़क पर गाड़ियों के गुजरते ही धूल का ऐसा गुबार उठता है कि सामने का रास्ता दिखना पूरी तरह बंद हो जाता है। इससे न केवल सड़क हादसों का डर बना हुआ है, बल्कि आसपास के गांवों के लोग सांस और आंखों की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। निर्माण एजेंसी द्वारा पानी का छिड़काव नहीं किए जाने से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।

जीरो विजिबिलिटी: सामने से आती गाड़ी भी नहीं दिखती

इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों ने बताया कि निर्माणाधीन हिस्से में धूल इतनी ज्यादा है कि दिन में भी हेडलाइट जलानी पड़ रही है। दोपहिया वाहन चालकों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। धूल आंखों और नाक में भर जाने के कारण गाड़ी चलाना जोखिम भरा हो गया है। जब कोई भारी वाहन जैसे ट्रक या बस गुजरती है, तो पीछे चल रहे लोगों को कुछ ही सेकंड के लिए बिल्कुल दिखना बंद हो जाता है। स्थानीय निवासी राजेश यादव ने बताया कि इस धूल के कारण आए दिन छोटे-मोटे हादसे हो रहे हैं, लेकिन ठेकेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

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घरों और खेतों पर जमी धूल की मोटी परत

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धूल की समस्या सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं है। सड़क किनारे बसे गांवों के घरों की छतों, खिड़कियों और दीवारों पर धूल की मोटी परत जम गई है। लोगों का कहना है कि वे दिन में कई बार सफाई करते हैं, लेकिन कुछ ही देर में सब कुछ सफेद हो जाता है। यही स्थिति खेतों की भी है। उड़ती हुई धूल फसलों की पत्तियों पर जम रही है जिससे पैदावार पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। किसानों ने बताया कि धूल के कारण पौधों का विकास रुक गया है और उन्हें कृषि कार्य करने में भारी परेशानी हो रही है।

निर्माण एजेंसी की लापरवाही: नियम ताक पर

नियम के मुताबिक सड़क निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए समय-समय पर टैंकरों से पानी का छिड़काव करना अनिवार्य है। लेकिन रतनपुर-पेंड्रा मार्ग पर यह काम केवल खानापूर्ति तक सीमित है।

यह भी जानकारी मिली है कि सड़क निर्माण में घटिया निर्माण समग्री का उपयोग किया गया है, जिससे स्थिति और खराब हो गई है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि दिन में एक-दो बार पानी डालने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि धूप और हवा के कारण सड़क तुरंत सूख जाती है। धूल के इस आतंक से स्कूली बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है।

 

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