नापतौल विभाग की सुस्ती से बाजार में कांटामारी तेज अफसरों की मेहरबानी से जनता की जेब कट रही

नापतौल विभाग की सुस्ती से बाजार में कांटामारी तेज अफसरों की मेहरबानी से जनता की जेब कट रही

रायपुर। बिलासपुर राजधानी समेत बिलासपुर संभाग में नापतौल विभाग के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और बाजार में खुलेआम कम तौल का खेल चल रहा है। साल 2025 में अप्रैल से लेकर नवंबर तक विभाग ने सिर्फ राजधानी में 83 केस दर्ज किए हैं जिसका मतलब है कि महीने भर में बमुश्किल 10 दुकानों की जांच हुई। अफसरों की इस सुस्ती का सीधा फायदा उन दुकानदारों को मिल रहा है जो गलत बाट और तराजू के जरिए ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं। विभाग की इस ढिलाई को देखकर लगता है कि अफसरों ने फील्ड में निकलना ही छोड़ दिया है।

हैरानी की बात यह है कि पोर्टल पर मिलने वाली शिकायतों का भी ठीक से निपटारा नहीं हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 42 शिकायतें विभाग को मिली थीं जिनमें से 5 अब भी धूल फांक रही हैं। पिछले साल यानी 2024-25 में विभाग ने 324 केस बनाए थे लेकिन इस बार यह आंकड़ा जमीन पर आ गिरा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कम कार्रवाई करने के पीछे असली खेल भ्रष्टाचार और साठगांठ का है ताकि व्यापारियों को परेशान न होना पड़े और अफसरों की जेब भी गर्म रहे।

शिकायतों पर नहीं हो रहा कोई ठोस काम

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नापतौल विभाग के पास केंद्रीय और राज्य स्तर के पोर्टल से लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं लेकिन विभागीय अमला जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रहा है। कई मामलों में तो केस दर्ज करने के तुरंत बाद राजीनामा कर लिया गया जिससे साफ है कि कार्रवाई केवल दिखावे के लिए की जाती है। आम जनता को उम्मीद थी कि डिजिटल इंडिया के दौर में शिकायत करना आसान होगा तो समाधान भी जल्दी मिलेगा लेकिन हकीकत में फाइलों का अंबार बढ़ता जा रहा है।

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पिछले साल के मुकाबले कार्रवाई चार गुना कम

मीडिया ने जब पुराने आंकड़ों से इसकी तुलना की तो पता चला कि विभाग की कार्यक्षमता गिरती जा रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में जहां 300 से ज्यादा व्यापारियों पर शिकंजा कसा गया था वहीं इस साल यह गिनती 100 तक भी नहीं पहुंच पाई है। अभी वित्तीय वर्ष खत्म होने में दो महीने बचे हैं लेकिन अफसरों की रफ्तार देखकर नहीं लगता कि वे पिछले साल के आसपास भी पहुंच पाएंगे।

बाजार में सब्जी बेचने वाले से लेकर बड़े शोरूम तक कम तौल की शिकायतें आ रही हैं। जनता परेशान है कि पैसे पूरे देने के बाद भी सामान कम मिल रहा है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारी केवल यही कह रहे हैं कि वित्तीय वर्ष के अंत तक आंकड़े सुधर जाएंगे लेकिन असल सवाल यह है कि अब तक हुई कांटामारी से जो नुकसान जनता का हुआ उसकी भरपाई कौन करेगा।

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