75 साल की उम्र में भी नहीं मिली राहत, 1998 के दुष्कर्म मामले में हाई कोर्ट ने ठुकराई जमानत, लंबे समय तक फरार रहने के तथ्य को माना अहम

75 साल की उम्र में भी नहीं मिली राहत, 1998 के दुष्कर्म मामले में हाई कोर्ट ने ठुकराई जमानत, लंबे समय तक फरार रहने के तथ्य को माना अहम

बिलासपुर : करीब 28 साल पुराने दुष्कर्म के मामले में 75 वर्षीय आरोपी ललन प्रसाद जायसवाल को हाई कोर्ट से जमानत नहीं मिली। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के चांदी-बेलसर निवासी ललन प्रसाद की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की सिंगल बेंच ने उसे खारिज कर दिया। अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और आरोपी के लंबे समय तक फरार रहने के अभियोजन के दावे को ध्यान में रखते हुए फिलहाल राहत देने से इनकार किया।

मामला वर्ष 1998 में सरगुजा जिले के अजाक थाने में दर्ज दुष्कर्म के अपराध से जुड़ा है। अभियोजन के मुताबिक 3 सितंबर 1998 को पीड़िता अपने घर पर थी। इसी दौरान ललन प्रसाद जायसवाल और लालजी अहिर उसके घर पहुंचे और उसके पिता के बारे में पूछताछ की। आरोप है कि इसके बाद ललन पीड़िता को कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद सह-आरोपी लालजी ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया।

28 साल तक रहा फरार, इसी कारण नहीं मिली जमानत

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मामले में आईपीसी की धारा 376(2)(जी), 450 और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(12) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। अभियोजन ने अदालत में कहा कि आरोपी करीब 28 वर्षो तक फरार रहा। इसी तथ्य को हाई कोर्ट ने जमानत याचिका पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना।

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पीड़िता ने नहीं किया जमानत का विरोध

सुनवाई के दौरान पीड़िता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से स्वयं हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुई। उसने आरोपी को जमानत दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही। इसके बावजूद अदालत ने मामले की परिस्थितियों और रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

बचाव पक्ष ने कहा- गांव में ही रह रहा था

ललन प्रसाद की ओर से अधिवक्ता अभिनव दुबे ने अदालत को बताया कि एफआईआर वर्ष 1998 में दर्ज हुई थी और आरोपी की गिरफ्तारी 1 जुलाई 2026 को हुई। बचाव पक्ष का कहना था कि ललन 1998 से ही अपने गांव में रह रहा था, इसलिए उसके वर्ष 2004 से फरार रहने का अभियोजन का दावा सही नहीं है। यह भी दलील दी गई कि आरोपी की उम्र 75 वर्ष है और वह गिरफ्तारी के बाद से जेल में है। मुकदमे के पूरा होने में समय लगने की संभावना को देखते हुए उसे जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी अदालत के संज्ञान में लाया कि इसी मामले के सह-आरोपी लालजी को दोषी ठहराया जा चुका है।

सरकार ने जताई दोबारा फरार होने की आशंका

राज्य की ओर से अधिवक्ता दीपा सिंह ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि ललन प्रसाद मामले का मुख्य आरोपी है और उस पर सह-आरोपी के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप है। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि लंबे समय तक फरार रहने वाला आरोपी जमानत मिलने के बाद दोबारा न्यायिक प्रक्रिया से बचने के लिए फरार हो सकता है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए ललन प्रसाद जायसवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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