उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक डॉ. तपेश को मिला राष्ट्रीय 'गुरु विशिष्ट' सम्मान, अमेरिका से लेकर भूटान तक मनवा चुके हैं लोहा
रायपुर। उच्च शिक्षा विभाग में अपर संचालक डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता को दयानंद सागर प्रबंध संस्थान, बैंगलोर ने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित 'गुरु विशिष्ट' सम्मान से सम्मानित किया है। वर्ष 2025-26 के लिए मिला यह सम्मान उन्हें उनके बेहतरीन शोधपत्र लेखन और शानदार शोध निर्देशन के कारण दिया गया इस सम्मान के लिए डॉ. गुप्ता के नाम का चयन उनके शोध पत्रों में उल्लेखित नाम के आधार पर किया गया है।
डॉ. तपेश चंद गुप्ता मूल रूप से उच्च शिक्षा विभाग में वाणिज्य के प्राध्यापक हैं। पूर्व में वे छत्तीसगढ़ शासन में संयुक्त सचिव के पद पर भी काम कर चुके हैं। प्रशासनिक महकमे में डॉ. गुप्ता हमेशा नियम -कानून का सख्ती से पालन करने वाले अधिकारी माने जाते हैं। उनके काम करने का तरीका सामान्य से बिल्कुल अलग है। इतनी भारी प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उनकी कलम कभी नहीं रुकी और वे लगातार शैक्षणिक लेखन में जुटे रहे।
रायपुर में एम कॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सूरत की साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। अकादमिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले डॉ. गुप्ता ने अब तक अलग-अलग संस्थानों में कई विषयों पर 488 व्याख्यान दिए हैं। उनके शोध का दायरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके 106 रिसर्च पेपर इंटरनेशनल लेवल के और 388 रिसर्च पेपर नेशनल लेवल के प्रकाशित हुए हैं।
वाणिज्य विषय में शोध निर्देशक की भूमिका निभाते हुए उन्होंने 16 शोध छात्रों को पीएचडी उपाधि के लिए मार्गदर्शन दिया है। इसके अलावा 76 रिसर्च थीसिस का मूल्यांकन भी किया है। विषयगत और शासकीय सेवा नियमों पर उन्होंने कई किताबें लिखी हैं। उनका चर्चित शोधग्रंथ "डेवलपमेंट ऑफ टूरिज्म इंडस्ट्री एंड मार्केटिंग इन इंडिया" तो जर्मनी के लैम्बर्ट एकेडमिक पब्लिशिंग ने इंटरनेशनल लेवल पर पब्लिश किया है।
ऐसा नहीं है कि उन्हें पहली दफा कोई बड़ा इनाम मिला हो। डॉ. गुप्ता को गुणवत्तापूर्ण शोध और आध्यापन के लिए पूर्व में भी सम्मानित किया जा चुका है। मिशिगन (USA) के आईसीजीबी-2013 में उन्हें 'बेस्ट डॉक्टोरल थीसिस अवार्ड' मिला था। इसके बाद मार्च 2019 में इंडो-भूटान एजुकेशन कॉन्क्लेव (थिम्पू) में 'इनोवेटिव पेडागोजी और बेस्ट टीचिंग प्रैक्टिस के लिए वैल्यू विजन अवार्ड-2018' दिया गया। अक्टूबर 2015 में साउथ एशिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (सिंगापुर) और जबलपुर मैनेजमेंट एसोसिएशन ने उन्हें 'ओवरऑल आउटस्टैंडिंग रिसर्च वर्क अवार्ड' से भी सम्मानित किया।
बीस सालों से ज्यादा समय तक राज्य के सेंट्रल बोर्ड ऑफ स्टडीज़ के अध्यक्ष और संयोजक रहे डॉ. गुप्ता का शौक भी काफी अलग है। उन्हें डाक टिकट और मुद्राएं जमा करने (फिलाटेली) में गहरी रुचि है। इस क्षेत्र में उन्होंने 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स', 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' और यूनिवर्सल वर्ल्ड रिकॉर्ड फोरम में रिकॉर्ड बनाए हैं।
दफ्तर में उनकी छवि भले ही सख्त अफसर की हो, लेकिन वे अपने कर्मचारियों और साथी अधिकारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) और राज्य सिविल सेवा नियमों को लेकर नियमित रूप से मुफ्त मार्गदर्शन देते नजर आते हैं। सरकारी सेवा के दौरान हमेशा नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करने वाले डॉ. गुप्ता का शिक्षा और रिसर्च के प्रति यह समर्पण उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है।
